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संसद में पेश डाटा में चूक, यहां जानिए सच- सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या घटी ही नहीं

Mon, 25 Nov 2019 02:25 PM IST
खुशबू गोयल अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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संसद में पेश किए डाटा में चूक हुई है, क्योंकि पुलिस के डाटा के मुताबिक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या कम हुई ही नहीं है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा सत्र में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि मोटर व्हीकल संशोधित एक्ट लागू होने के बाद सितंबर-अक्तूबर में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। सरकार ने पिछले साल सितंबर-अक्तूबर और इस साल के दोनों महीने में हुई सड़क दुर्घटनाओं की तुलना करते हुए डाटा सामने रखा है।
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सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सड़क दुर्घटना में मारे गए मृतकों की संख्या में चंडीगढ़ में 75 फीसदी, हरियाणा में 11.8 फीसदी, यूपी में 9.8 फीसदी और गुजरात में 13.8 फीसदी कमी आई है, लेकिन सरकार के डाटा में कुछ खामियां हैं। ऐसा लगता है कि सरकार ने डाटा जारी करने में जल्दबाजी दिखाई है। संसद में पेश डाटा के मुताबिक, इस साल के सितंबर-अक्तूबर में सड़क दुर्घटनाओं में कुल दो लोग मारे गए, जबकि यह डाटा सही नहीं है। सितंबर महीने में तो दो लोगों की मौत हुई, लेकिन अक्तूबर में 13 लोगों की। यानी दोनों महीनों में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 15 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

डाटा के मुताबिक, पिछले साल सितंबर- अक्तूबर में कुल आठ मौत हुई थी। यह भी डाटा सही नहीं है। पिछले साल सितंबर में कुल आठ मौतें हुईं, जबकि अक्तूबर में सात हुई थी। कुल मिलाकर डाटा के खेल में मंत्रालय बताना चाहता था कि नए कानून के बाद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई, लेकिन यह भी सही नहीं है। पिछले साल सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में हुई सड़क दुर्घटनाओं में कुल 21 लोगों की मौत हुई, जबकि इस साल तीनों महीनों में कुल 22 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिसाब से सड़क दुर्घटनाओं की मौतों में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है।
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रात के वक्त ज्यादा एक्सीडेंट, नहीं रहती ट्रैफिक पुलिस

इस साल सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में कुल 22 लोगों की मौत हुई है। इनमें 17 मौतें रात के वक्त हुई हैं, जबकि बाकी दिन में। रात में हादसे क्यों ज्यादा हुए हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला, रात के वक्त सड़कें खाली होती हैं और लोग ओवरस्पीड में वाहन चलाते हैं।

दूसरा, ट्रैफिक पुलिस न होने के कारण रात में उनकी रफ्तार में लगाम लगाने वाला कोई नहीं होता। डंकन ड्राइव के नाके लगते हैं, लेकिन अब वे ज्यादा इफेक्टिव नहीं रहे हैं। क्योंकि नाके रात साढ़े 12 बजे तक ही लगते हैं। तीसरा, चौक में जो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वे नाइट विजन नहीं है। इसका मतलब है कि रात के वक्त कोई ट्रैफिक नियम तोड़ता है तो उसे पकड़ पाना मुश्किल है, जबकि दिन में कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ  टीवीआईएस के तहत चालान कट जाता है। इससे दिन में लोग ट्रैफिक नियम तोड़ने में बचते हैं।

लोगों का जागरूक होना जरूरी
रोड एक्सीडेंट के प्रति जागरूकता लाने वाली संस्था अराइव सेफ  के संस्थापक हरमन सिंह सिद्धू का मानना है कि सख्त कानून के साथ लोगों में जागरूकता जरूरी है। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक सड़क हादसे नहीं रुकेंगे। अधिकतर हादसे ओवरस्पीड व शराब के नशे में वाहन चलाने से होते हैं। हालांकि, यहां दूसरे शहरों के मुकाबले चंडीगढ़ में सड़क दुर्घटनाएं काफी कम हैं। दिन में तो ट्रैफिक पुलिस ठीक ढंग से काम करती है। रात में चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस को ओवरस्पीड नाके लगाने चाहिए।

ट्रैफिक पुलिस की भी एक टीम को रात के वक्त गश्त करने की जरूरत है। तभी रात में हादसे रुक सकेंगे। ध्यान रहे कि कभी भी शराब का सेवन या फिर देर रात नींद में होने के बावजूद गाड़ी को चलाने से बचना चाहिए।

चालान से बचने के कारण होते हैं ज्यादा हादसे

पंजाब सरकार के ट्रैफिक एडवाइजर नवदीप असीजा ने बताया कि सड़क हादसे हर शहर की गंभीर समस्या है। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से चालक अपने वाहनों का चालान कटने से बचने के कारण वाहनों को तेजी से दौड़ाते हैं, जिससे सड़क हादसे का खतरा बना रहता है।

चालान का मकसद ही होता है हादसों को कम किया जाए। चालकों को सीमित रफ्तार में अपने वाहनों को चलाना चाहिए। देर रात हादसे शराब का सेवन या फिर चालकों की गलती के कारण होते हैं। रात के वक्त लोग ओवरस्पीड पर ज्यादा वाहन चलाते हैं। इस बारे में खासकर युवाओं को ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है।

साल 2018                साल 2019
महीना    मौत             महीना     मौत
सितंबर    8               सितंबर    02
अक्तूबर   7               अक्तूबर   13
नवंबर     6                नवंबर     07
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अब तक कहां कितने रुपये के चालान कटे

मंत्रालय ने बताया है कि अब तक चंडीगढ़ में 5,58,25,650 रुपये, असम में 15,45,500 रुपये, छत्तीसगढ़ में 14,81,800 रुपये, यूपी में 2,01,91,31,192 रुपये का चालान काटा जा चुका है। वहीं, राजधानी दिल्ली में 34,15,07,607 रुपये, राजस्थान में 5,56,77,662 रुपये, बिहार में 78,37,18,969 रुपये, पंजाब में 85,64,701 रुपये, उत्तराखंड में 3,05,36,284 रुपये, गुजरात में 1,01,27,85,400 रुपये, महाराष्ट्र में 4,16,63,977 रुपये, हरियाणा में 72,18,84,608 रुपये का चालान काटा जा चुका है।

38 लाख चालान काटे गए
अब तक 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 5,77,51,79,895 रुपये का चालान कट चुका है। वहीं, 38 लाख लोगों के चालान काटे गए हैं। तमिलनाडु में सबसे अधिक चालान काटे गए हैं। यहां 14,13,996 लोगों का चालान काटा गया है। सरकार ने बताया कि किसी राज्य द्वारा नए कानून लागू न करने की बात सामने नहीं आई है, लेकिन कुछ राज्यों ने चालान की दरों में जरूर कटौती की है।

संसद में सड़क हादसों को लेकर क्या डाटा पेश हुआ है, इसको चेक करवा लेता हूं। साथ ही सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस पूरी प्रयास में जुटी हुई है। पुलिस समय-समय पर ट्रैफिक नियमों पर लोगों को अवेयरनेस करती है, जिससे हादसों में कमी आ सके।
- चरणजीत सिंह, डीएसपी ट्रैफिक
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