चीज दिलाने के बहाने साथ ले गया
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि बच्ची के परिवार के पड़ोस में रहने वाले सुनील ने बच्ची को 10 रुपये देने चाहे और उसके गालों को छुआ। जब उसने पैसे लेने से मना कर दिया तो वह उसे खाने की चीज दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। इसके बाद से बच्ची गायब हो गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और 19 नवंबर को सुनील को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने 21 फरवरी 2024 को सुनील को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई और इस पर मोहर के लिए हाईकोर्ट में रेफरेंस भेजा था।
दोषी ने उम्र के आधार पर मांगी थी रहम
दूसरी ओर, जिला अदालत के आदेशके खिलाफ सुनील ने अपील दाखिल की थी। अपील में उसने मर्डर रेफरेंस को मंजूरी न देने का आग्रह किया था। इसके पीछे तर्क दिया कि यह दुर्लभतम मामला नहीं है। अभी उसकी उम्र केवल 23 साल है और ऐसे में उस पर रहम किया जाए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही पाया और सुनील की अपील को खारिज कर दिया।
लावारिस हालत में मिली थी बच्ची, मुंह पर था लिफाफा
पुलिस एफआईआर के अनुसार, 12 नवंबर 2018 को बच्ची की लाश लावारिस हालत में मिली थी। उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे औैर शव लहूलुहान था। बच्ची के चेहरे को प्लास्टिक बैग (लिफाफा) से ढका गया था ताकि उसकी पहचान न हो। इसके बाद पुलिस ने बच्ची के परिजनों को ढूंढकर पिता का बयान दर्ज किया। बच्ची का परिवार मूलरूप से बंगाल का रहने वाला है और गुरुग्राम में दिहाड़ी-मजदूरी करके घर चलाता है।