हरियाणा में प्राइवेट चार पहिया और दुपहिया वाहन खरीदने वालों को अब रजिस्ट्रिंग अथॉरिटी (एसडीएम दफ्तर) के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वाहनों का रजिस्ट्रेशन का जिम्मा वाहन डीलर का ही होगा। एसडीएम दफ्तर में लोगों को पुराने वाहनों के पंजीकरण के लिए ही जाना पड़ेगा।
परिवहन विभाग के प्रधान सचिव आरआर जोवल ने बताया कि मंत्रिमंडल पहले ही यह प्रस्ताव मंजूर किया जा चुका है, जिस पर अमलीजामा पहनाने का काम शुरू हो गया है।
उन्होंने बताया कि सभी वाहन डीलरों के कंप्यूटर पर साफ्टवेयर डाला जाएगा, जिसमें नंबर भी होंगे। सभी वाहन डीलरों को पंजीकरण के लिए अधिकृत किया जाएगा। डीलर पंजीकरण के लिए जरूरी कागजात खरीददार से लेंगे जबकि वाहन का नंबर कंप्यूटर खुद बताएगा।
वाहन पंजीकरण के बाद सारे कागज संबंधित एसडीएम कार्यालय भेज दिए जाएंगे। रिकार्ड एसडीएम दफ्तर में ही रहेगा। जब तक डीलर पंजीकरण शुरू नहीं करेंगे तब तक एसडीएम कार्यालय में पंजीकरण होता रहेगा।
जोवल ने बताया कि यह भी फैसला किया गया है कि लोगों की सुविधा के लिए मुख्यालय से वीआईपी नंबर अब 1 से 20 तक अलाट किए जाएंगे, जबकि 21 से 9999 तक एसडीएम और बाद में डीलर के पास जारी होंगे।
वीआईपी नंबर की कीमत पहले की तरह रहेगी। अभी तक मुख्यालय से एक से 100 नंबर तक अलाट किए जाते हैं जबकि एसडीएम दफ्तर से 101 से 9999 तक अलाट होते हैं।
उन्होंने बताया कि एक नंबर के लिए इस समय पांच लाख रुपये कीमत है। नंबर 7 और 9 की कीमत डेढ़ लाख रुपये और 2, 6 और 8 के लिए 75000 रुपये है। नंबर 10, 11, 22, 33, 44, 55, 66, 77, 88, 99, 100, 786 की कीमत 50000 रुपये है।
नंबर 12 से 21 तक, 111, 222, 333, 444, 555. 666. 777. 888. 999 और अन्य कुछ के लिए कीमत 25000 रुपये है। बिना बारी के नंबर लेने की कीमत 10000 रुपये है।
जोवल ने बताया कि जिन लोगों के पास वीआईपी नंबर हैं उन्हें अपने पास रखने का प्रावधान पहले से है। उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।