लावारिस शवों की दुर्गति के बाद उनका अमर्यादित ढंग से अंतिम संस्कार करना कोई नई बात नहीं है। काउंसिल के कर्मचारियों ने बताया कि करीब 25 वर्षों से यह सिलसिला जारी है। कभी ट्राली में शव जाते हैं तो कभी कूड़ेदान में। अब तक ऐसे 35 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है।
अब एसडीएम करेंगे जांच: डीसी
फतेहगढ़ साहिब के डिप्टी कमिश्नर डॉ. प्रशांत कुमार गोयल ने कहा कि यह बहुत ही निंदनीय कार्रवाई है। इसकी जांच एसडीएम फतेहगढ़ साहिब को सौंपी गई है, जो जल्द रिपोर्ट देंगे। किसी भी सूरत में मानव अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा। डीसी ने यह भी कहा कि सिविल अस्पताल से बाकायदा शव को नगर काउंसिल के सुपुर्द किया जाता है। फिर भी काउंसिल अधिकारियों की ड्यूटी बनती है कि वह ऐसे मामलों में संजीदगी व मानवता वाला रवैया अपनाएं।
हमारे पास शव वाहन नहीं है: काउंसिल प्रधान
नगर काउंसिल सरहिंद के प्रधान शेर सिंह ने इस मामले पर चिंता जाहिर करते कहा कि शव को कूड़ेदान में डालकर शमशानघाट ले जाना कमजोर प्रबंधन की नाकामी है। उन्होंने नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी गुरपाल सिंह को इस मामले पर ध्यान देने की गुजारिश की है। शेर सिंह ने यह भी कहा कि हमारी काउंसिल के पास खुद का शव वाहन (मोर्चरी वैन) नहीं है। जिसकी कमी भी जल्द पूरी कर ली जाएगी।