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अमृतसर ट्रेन हादसाः दलबीर ने बचाई थी 3 लोगों की जान, अभी तक मुआवजे को तरस रही मां...फूट-फूटकर रोई

Tue, 25 Dec 2018 01:48 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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मृतक दलबीर और उसकी मां
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अमृतसर में दशहरे की शाम हुए रेल हादसे ने न केवल 59 लोगों की जिंदगी लील ली बल्कि रिश्तों के ताने-बाने भी तार-तार कर दिए। पंजाब सरकार के साथ-साथ कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा भेजी राहत राशि से लोगों को मदद तो मिल रही है, लेकिन इसी पैसे से घरों में दरारें भी आ गई हैं। 20 साल से रामलीला में भूमिका निभाने वाले दलबीर सिंह ने इस बार जौड़ा फाटक में पहली बार रावण का रोल किया था। 

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 हादसे में दलबीर ने तीन लोगों की जान बचाई थी, लेकिन अपनी जान गंवा बैठा था। दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी दलबीर की मां स्वर्ण कौर की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे है। उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटे की अंतिम निशानी दलबीर की बेटी मनप्रीत (8 माह) को अपने पास रखने की है। नम आंखों के साथ स्वर्ण कौर ने बताया कि दलबीर की पत्नी नवप्रीत कौर पति की मौत के 20 दिन बाद अपने दहेज का पूरा सामान और बेटी मनप्रीत को साथ लेकर मायके चली गई थी। 

साथ ही पंजाब सरकार और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा दी गई राहत राशि भी ले गई है। स्वर्ण कौर ने कहा कि वाहेगुरु का शुक्र है कि दिल्ली से आए कुछ लोगों ने मेरी बात सुन पोती मनप्रीत कौर के नाम 10 लाख की राशि उसके 18 साल के होने तक जमा करवा दी है। इसके बाद भी उन्हें संदेह है कि बहू के मायके वाले उस राशि को कही खुर्द-बुर्द न कर दें। 

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मृतक दलबीर सिंह
स्वर्ण कौर कहती हैं कि मेरी बहू ने मुझे फूटी कौड़ी नहीं दी। दलबीर की मौत के बाद उसके माता-पिता घर आए। कहने लगे कि इसकी उम्र छोटी है। जिंदगी अकेले नहीं जी जा सकती और नवप्रीत को अपने साथ ले गए। वे कहती हैं कि बहू बेशक अपना घर बसाए लेकिन मुझे मेरे बेटे की निशानी दे जाए। जब बहू की शादी हो जाएगी तो क्या मुझे अपने पोती लेने का अधिकार नहीं है।

 इस दौरान स्वर्ण कौर की आंखें छलकने लगी। स्वर्ण कौर ने बताया कि मेरे बेटे मजदूरी करते थे। बड़ा बेटा बलबीर भी काम पर जाता था लेकिन जब से दलबीर की मौत हुई है, उसका मजदूरी करने में दिल नहीं लग रहा। भाई को याद करते ही रोना शुरू कर देता है।

वे कहती हैं कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, पंजाब सरकार मेरे बड़े बेटे को नौकरी दे दे। कुछ पल खामोश रहने के बाद स्वर्ण कौर ने कहा कि पता नहीं मोदी सरकार ने दो लाख की राशि अभी तक क्यों नहीं भेजी। जब उन्हें कहा गया कि यह राशि भी बहू को मिलेगी, तो रोते-रोते बोली फिर मैं रोटी कहां से खाऊंगी।

धार्मिक विचारों का था दलबीर
बीबी स्वर्ण कौर ने बताया कि मेरा बेटा धार्मिक विचारों का था। 20 साल से रामलीला में कई रोल करता था। हर साल अपने कंधों पर राम-लक्ष्मण पात्रों को उठाकर रावण के पास लेकर जाता था।

 उस मनहूस दिन जब वह स्टेज पर पहुंचा तो उसने देखा कि रेल ट्रैक पर काफी लोग खड़े हैं। अपने तीन साथियों को साथ लेकर ट्रैक के पास गया। उधर से गाड़ी आ रही थी। दलबीर और उसके साथियों ने कई लोगों को धक्के मारकर ट्रैक से हटाया लेकिन उसका पांव भी ट्रैक में फंस गया और उसकी मौत हो गई। 
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