चंडीगढ़ के साइकिल ट्रैक पर अब तक का सबसे बड़ा सर्वे हुआ है। 11 सदस्यीय टीम ने 10 दिन तक कई घंटे साइकिल चलाकर पूरे 265 किमी के ट्रैक का सर्वे किया है। रिपोर्ट में बताया है कि जगह-जगह बने टाइल के ट्रैक खतरनाक हैं। कई जगह बिजली के तार लटक रहे हैं, तो कहीं पेड़ की टहनियां। पूरे ट्रैक की फोटो और वीडियोग्राफी की गई है, जिसकी रिपोर्ट इंजीनियरिंग विभाग के सचिव विजय नामदेवराव जड़े को सौंप दी गई है।
चंडीगढ़ प्रशासन के आग्रह पर यह सर्वे साइकिलगिरी एनजीओ ने किया है। इसके लिए साइकिलगिरी के अक्षित पासी, एसएस भट्टी, अदिति सूद, डॉ. सुनैना बंसल, रेखा मित्तल, संदीप गोयल, सुनील, डॉ. अशोक वढेरा, गौरव चुग, अमित गर्ग और डॉ. निशि को मिलाकर दो-दो लोगों की एक टीम बनाई गई। इन सभी ने इलाका चुना और सुबह, दोपहर व शाम को 265 किमी के ट्रैक पर साइकिल चलाकर इस सर्वे को पूरा किया। टीम के अमित गर्ग ने रिपोर्ट को कंपाइल किया है, जिसे लेकर मंगलवार को इंजीनियरिंग विभाग के सचिव विजय नामदेवराव जड़े व चीफ इंजीनियर सीबी ओझा को एक प्रेजेंटेशन दी गई। इसके साथ ही अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट भी सौंपी है। सचिव विजय नामदेवराव जड़े ने छह महीने में सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
ट्रैक के फोटो और वीडियोग्राफी के लिए बनाया मोबाइल एप
सर्वे के दौरान शहर के सभी सेक्टर व इलाकों के साइकिल ट्रैक की फोटो और वीडियोग्राफी की गई है। तस्वीरों और वीडियो को एक जगह और लोकेशन-समय के साथ रखा जा सके, इसके लिए एनजीओ की तरफ से एक मोबाइल एप भी बनाया गया। टीम के अक्षित पासी ने बताया गया कि आमतौर पर एक किलोमीटर साइकिल चलाने में 5 मिनट लगते हैं, लेकिन टीम के सदस्यों ने करीब 15 मिनट लगाए हैं, ताकि पूरे साइकिल ट्रैक का सर्वे और वीडियोग्राफी की जा सके।
एक भी रुपया लिए बिना पूरे शहर का किया सर्वे
साइकिलगिरी एनजीओ की टीम ने प्रशासन से इस सर्वे के लिए कोई फीस नहीं ली है। टीम के एक सदस्य ने कहा कि वह चंडीगढ़ में पैदा हुए हैं और यहीं पर पले-बढ़े हैं। टीम के सभी सदस्य चाहते हैं कि चंडीगढ़ के साइकिल ट्रैक देशभर में सबसे अच्छे हों। चंडीगढ़ ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। सभी सदस्यों को अच्छा महसूस हो रहा है कि उन्होंने शहर के लिए कुछ किया है। बैठक में सदस्यों ने प्रशासन को सुझाव भी दिया है कि एक अलग विभाग या विंग बनाना चाहिए, जहां पर लोग साइकिल ट्रैक से संबंधित शिकायत व सुझाव दे सकें।
रिपोर्ट में बताई गई मुख्य समस्याएं
1. मटका चौक, सेक्टर-39 समेत कई इलाकों में बनाए गए टाइल के साइकिल ट्रैक पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। बारिश में फिसलकर लोग गिरते हैं। ये खतरनाक है।
2. कई जगह ट्रैक को खोद कर पाइप या तार डालने का काम चल रहा है। काम खत्म होने के बाद भी ट्रैक बराबर नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं।
3. सेक्टर-52 की तरफ साइकिल ट्रैक को तुरंत रिपेयर करने की जरूरत है। सेक्टर-41 में साइकिल ट्रैक पर सबसे ज्यादा गाड़ियां खड़ी रहती हैं।
4. सेक्टर-40, 41 और 48 के साइकिल ट्रैक कई वर्षों से बन ही रहे हैं। कुछ नए बने ट्रैक की क्वालिटी भी खराब है।
5. कई जगह पर लोगों ने पीछे की दीवार में गेट बना लिए हैं और ड्रेनेज का पानी और कूड़ा ट्रैक पर गिरा रहे हैं। इससे ट्रैक फिसलन भरे हो जाते हैं और टूट भी रहे हैं।
6. मटका चौक पर ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से साइकिल सवार कई घंटे तक सड़क पार करने के लिए खड़े रह जाते हैं। लाइट्स की जरूरत है।
7. कई बस स्टैंड ट्रैक के नजदीक हैं और उनकी ऊंचाई बेहद कम है। उनसे लोगों के सिर में चोट लग सकती है। उदाहरण के लिए सेक्टर-22 का बस स्टैंड।
8. कई जगह ट्रैक के बीच तार लटक रही होती है, जो अंधेरे में दिखाई नहीं देते हैं और लोग उन में फंस कर चोटिल हो रहे हैं।
9. शहर में 10-12 पेड़ ऐसे हैं, जिनकी टहनियां साइकिल ट्रैक के बीचो-बीच हैं।
10. कई ट्रैक पर लाइट नहीं है। कई जगह मैनहोल के गटर हैं, तो कहीं बड़े गड्ढे हैं।