साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन सेल (सीसीआईसी) को अब साइबर सेल पुलिस थाना बना दिया गया है। गृह सचिव नितिन कुमार यादव ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी की। फिलहाल साइबर सेल से ही साइबर थाना चलेगा। आने वाले समय में जगह मिलने पर इसे शिफ्ट कर दिया जाएगा। अब सीधे साइबर थाने में एफआईआर दर्ज होगी। पहले साइबर सेल की शिकायत एसएसपी विंडो पर देनी पड़ती थी, उसके बाद संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज होती थी। वहां से केस साइबर सेल ट्रांसफर किया जाता था।
साइबर सेल पुलिस थाने में इंस्पेक्टर रैंक का एसएचओ होगा। वर्तमान में निरीक्षक हरिओम शर्मा प्रभारी हैं। एक एसएचओ के पास होने वाली पावर निरीक्षक के पास होगी। थानों की तरह साइबर थाने में भी सभी रिकॉर्ड रजिस्टर, कम्यूटर, मालखाना और हवालात होगी। साइबर थाने में रिकॉर्ड रजिस्टर और अन्य चीजें मंगवाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
यूटी प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने बीते 13 जून को सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव के कार्यक्रम में साइबर सेल को साइबर थाना बनाने की घोषणा की थी।
थानों में बनाए गए हैं साइबर डेस्क
चंडीगढ़ में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए यूटी पुलिस ने शहर के अलग-अलग थानों में साइबर डेस्क भी बनाए हैं। थाने में आने वाली साइबर ठगी की शिकायतों पर यह डेस्क अपने स्तर पर जांच कर केसों का निपटारा कर रहा है। साइबर डेस्क पर तैनात पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग भी दी गई है।
साइबर सेल में आने वाली शिकायतें साल दर साल लगभग दोगुनी होती जा रही हैं। फोन पर धमकी, फर्जी नाम से सोशल मीडिया का इस्तेमाल, एटीएम पिन पूछना, एटीएम कार्ड बदलकर पैसा निकालना समेत अन्य शिकायतों का साइबर सेल में ढेर लगा होता है। इसकी वजह से केसों का निपटारा करने में हफ्तेभर या कई बार महीनों तक का समय लग जाता था। इससे शिकायतकर्ता को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
88 शिकायतों पर एक पुलिसकर्मी
साइबर सेल में आने वाली शिकायतों का आंकड़ा दोगुने की रफ्तार से बढ़ता जा रहा है लेकिन केस के निपटारे का आंकड़ा काफी कम है। इसकी एक वजह यह भी है कि साइबर सेल में अभी लगभग 70 पुलिसकर्मियों की तैनाती है। 2020 में साइबर सेल को 6220 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं। सिर्फ एक पुलिसकर्मी औसत 88 शिकायतों पर काम कर रहा है, जो काफी बड़ा आंकड़ा है।
कई साल से लटका है साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव
साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्ष 2018 में पुलिस विभाग ने शहर में अलग से साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव लंबे समय से लटका था। हैदराबाद, बंगलूरू, जयपुर समेत अन्य शहरों में साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग से पुलिस थाना बना है। साइबर सेल अधिकारी का कहना है कि अलग से थाना बनने से काफी हद तक साइबर अपराधों में कमी आएगी।
ये ठगी सबसे ज्यादा
बता दें कि साल 2020 में साइबर ठगी की करीब 6300 शिकायतें आई थीं। इनमें सबसे ज्यादा कार्ड क्लोनिंग, एटीएम पिन, ऑनलाइन शॉपिंग, अकाउंट हैकिंग, ऑनलाइन नौकरी, ओएलएक्स पर खरीदारी, एनी डेस्क एप समेत अन्य तरह की ठगी के मामले शामिल थे।
हर साल बढ़ रहीं शिकायतें, इस वर्ष आईं 2738 शिकायतें
साल 2017 में साइबर सेल के पास 2242 शिकायतें आई थीं। वर्ष 2018 में 3167, वर्ष 2019 में 4793, वर्ष 2020 में 6220 और 2021 में 5922 शिकायतें आईं। वर्ष 2022 में 8 जून तक 2738 शिकायतें आ चुकी हैं। 2738 शिकायतों पर साइबर सेल ने 67 एफआईआर दर्ज की है।