पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों ने बैंक खाते के साथ रजिस्टर किए गए ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों को उसी जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में तब्दील कर दिया, जिस कारण आरोपी अपने इन मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी के द्वारा उसके खातों का वर्चुअल कंट्रोलर बन गया। इस केस में अमित शर्मा उर्फ नितिन ने अपने आप को आकाश अरुण भाटिया (केस का पीड़ित) के तौर पर अपनी पहचान बनाई और उसके (भाटिया) बैंक खातों की इंटरनेट बैंकिंग पहुंच हासिल कर ली। इसके बाद आरोपी ने नकली दस्तावेज जमा करवा कर विक्रम सिंह के नाम पर खोले और पांच अलग-अलग खातों में पैसे तब्दील कर लिए।
एटीएम से निकाले पैसे
आरोपियों ने एटीएम कार्डों और चेकों के द्वारा सारे पैसे निकाले। जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सका। इसके अलावा, मोबाइल नंबर सिर्फ अपराध करने के समय ही इस्तेमाल किए जाते थे और उसके बाद नॉट-रीचेबल हो जाते थे। अर्पित शुक्ला ने कहा कि जांच के दौरान मोबाइल फोन की लोकेशन से पता लगा कि लुटेरे लुधियाना से गिरोह चला रहे थे।
पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं दो आरोपी
धोखाधड़ी में शामिल दो आरोपी राजीव कुमार पुत्र देव राज और दीपक कुमार गुप्ता पुत्र दर्शन लाल गुप्ता निवासी शिमलापुरी को लुधियाना से 28 जनवरी को गिरफ़्तार कर लिया था लेकिन यह मुख्य आरोपी उस समय पर फरार होने में सफल हो गया था। उन्होंने कहा कि इस साइबर अपराधी अमित शर्मा निवासी दयोल एन्क्लेव, लुधियाना के विरुद्ध पंजाब और हरियाणा राज्य के अलग-अलग थानों में छह एफआईआर दर्ज हैं।