कड़ाके की ठंड के चलते शहर में टोपियों और मफलर का क्रेज बढ़ गया है। विभिन्न प्रकार की टोपियों ने युवाओं से लेकर हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना लिया है। बाजार में पचास से लेकर 500 रुपये तक की टोपियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा 500 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक के मफलर भी उपलब्ध हैं। ऊन से बुनी टोपियां भी चंडीगढ़ में आसानी से मिल रही हैं। इन टोपियों को खासतौर पर युवा लड़के-लड़कियों के लिए तैयार किया जाता है। चंडीगढ़ में बिकने वाली इन टोपियों का स्टाइल देखते ही बनता है।
कुल्लू की टोपियां हैं खास
चंडीगढ़ में कुल्लू की टोपियां सबसे ज्यादा खास हैं। यह सिर्फ सिर को ही नहीं ढ़कती हैं परंतु ठंठ में सिर को गर्म भी रखती हैं। इस कारण लोग इनको पहनना काफी ज्यादा पसंद करते हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित लाला लाजपत राय भवन में आयोजित कुल्लू फेस्ट में कुल्लू की खास टोपियां उपलब्ध हैं। यहां आए एक कारीगर ने बताया कि कुल्लू टोपियां शुद्ध ऊन से तैयार की जाती हैं। इनका बार्डर खड्डी पर तैयार किया जाता है व इसके अलावा डिजाइनिंग भी हाथ से करवाई जाती है।
कश्मीर की टोपी में होता है लेदर का प्रयोग
खास तौर पर तैयार की गई कश्मीर की टोपियां सिर को एकदम गर्म कर देती हैं। यह टोपियां कश्मीर में ही तैयार की जाती हैं। इन टोपियों की खूबी है कि यह सिर को ढांपने के साथ कान को भी ढांप लेती है। कारीगर राजकुमार ने बताया कि कश्मीर की टोपी को बनाने के लिए कश्मीर की खास ऊन का प्रयोग किया जाता है। इसकी ऊपरी परत में लेदर का भी प्रयोग किया जाता है जिससे कि हवा तक भीतर नहीं जा पाती।
बढ़ रहा मफलर का प्रचलन
चंडीगढ़ के युवाओं में अब मफलर का प्रचलन भी काफी ज्यादा बढ़ गया है। शुद्ध ऊन से तैयार किए गए मफलर को यूथ अपने कोट के साथ पहनते हैं। डिजाइनर बलजीत कौर ने बताया कि मफलर और टोपी तो हमेशा से ही युवाओं की पहली पसंद रहा है। खुद को आर्कषक दिखाने के लिए युवा टोपियों और मफलर का प्रयोग करते हैं।
इन मूल्यों में उलब्ध हैं मफलर व टोपियां
साधारण मफलर : 200 रुपये
ऊनी मफलर : 500 रुपये
याक वूल मफलर : 1000 रुपये
पश्मीना : 2640 रुपये
कुल्लू टोपी : 120 रुपये से 520 रुपये