यूं तो सीटीयू काफी अपडेट रहता है। बसों में स्टॉपेज की एनाउंसमेंट की बात हो या डिस्पले पर वुमन हेल्पलाइन नंबर या फिर डेली पास के रेट की बात, सीटीयू कोई कोताही नहीं बरतता। लेकिन 12 मार्च से सीटीयू की बसों का डेली पास एसी का 40 से बढ़कर 60 और नॉन एसी का 30 से बढ़कर 50 रुपये हो चुका है। लेकिन अभी भी सीटीयू की बसों में डिस्पले पर पुराना रेट ही दिखाया जा रहा है।
क्या कहना है कंडक्टर का : जीरकपुर से पीजीआई जाने वाली 36 नंबर एसी बस के कंडक्टर जसवंत सिंह से पूछने पर उन्होंने बताया कि किराया तो 12 मार्च से बढ़ चुका है, लेकिन पता नहीं डिस्पले पर क्यों नहीं बदला गया। इससे सवारियों को भी कन्फ्यूजन हो रही है। किराया बदलते ही यहां भी अपडेट करना चाहिए था।
ये है सवारियों की राय
इसी बस में सफर कर रहे अंशुल कुमार, विजय धवन और सुनीता का कहना था कि जब रेट बढ़े तो डिस्पले पर भी तुरंत चेंज होना चाहिए। ऐसा न होने पर ज्यादा दिक्कत तो उन्हें आती है जो कभी-कभी इन बसों में सफर करते हैं। यदि पता हो तो पास बनवाने की बजाय एक साइड की टिकट ली जा सकती है।
पास होने के बाद भी दोबारा निकालते हैं पर्ची
एक तरफ तो पीएम मोदी डिजिटल इंडिया के सपने दिखा रहे हैं दूसरी तरफ सीटीयू में बस पास होने के बाद भी उसे चेक करके दोबारा पर्ची निकाली जाती है। यानी यदि आपके पास बस पास है तो भी कंडक्टर उसे चेक करके दोबारा इतना लंबा पर्चा निकालकर एंट्री करता है। इससे कागज और समय वेस्ट होता है। इसकी बजाय होना तो यह चाहिए कि बस पास को केवल चेक कर लिया जाए या उसकी एंट्री कर ली जाए। बार-बार पास बनाने से कागज की बर्बादी ही है।
इस पर जीएम गुप्ता का कहना है कि उन्हें रोजाना का रिकार्ड चाहिए होता है कि एक दिन में सीटीयू की बस में कितने यात्रियों ने सफर किया इस डाटा के लिए यह एंट्री जरूरी है इसलिए ऐसा किया गया है। कागज की बर्बादी जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि एक रोल मात्र 7 रुपये का ही आता है।
‘डिस्पले पर पुराने रेट की बात मेरे संज्ञान में नहीं थी, तुरंत ही बस के अंदर चलने वाले डिस्पले पर यह बदलवा दिया जाएगा।’
- अमित गुप्ता, जीएम सीटीयू