चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में तीन दिनों से सीटी स्कैन बंद है जिससे इमरजेंसी के साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को सीटी स्कैन के लिए आसपास के सेक्टर के निजी डायग्नोसिस सेंटर में भेजा जा रहा है। यहां सीटी स्कैन करवाने से मरीजों व उनके परिजनों की जेब ढीली हो रही है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी और ट्रॉमा के मरीज के परिजनों को सीटी स्कैन के लिए यहां से वहां गंभीर मरीज को लेकर चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मशीन काफी पुरानी हो गई है, इसलिए उसके खराब पार्ट्स बदलने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, कंपनी उसी मशीन को अगले पांच वर्षों के लिए अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
एक मशीन सैकड़ों मरीज
जीएमसीएच-32 में सीटी स्कैन की एक ही मशीन है। उस मशीन से इमरजेंसी के साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच की जाती है। जानकारी के अनुसार उस एक मशीन से प्रतिदिन 150 से 200 सीटी स्कैन होती है। ऐसे में लगभग 8 साल पुरानी मशीन पर लोड बढ़ने से उसके पार्ट्स खराब हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि मशीन की मरम्मत को लेकर अनदेखी भी की जा रही है, क्योंकि कमीशन के चक्कर में आसपास के सेक्टर में संचालित हो रही निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीजों को धड़ल्ले से जांच के लिए भेजा जा रहा है।
कमेटी के गठन की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी
जीएमसीएच-32 में जरूरतमंद मरीजों को जांच में राहत देने के लिए पूर्व डायरेक्टर प्रिंसिपल के कार्यकाल में एक कमेटी का गठन किया गया था। शहर के निजी डायग्नोसिस सेंटरों से रेट लिस्ट लेकर उसे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की पहुंच के हिसाब से संशोधित कर लागू कराना था। इसके लिए लगभग सात सेंटरों ने अस्पताल की रेट लिस्ट के अनुसार वहां आने वाले मरीजों को रियायत देने की हामी भी भरी थी। मरीजों की सहूलियत के लिए उस सुविधा को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई थी लेकिन इसी बीच डायरेक्टर प्रिंसिपल का निधन हो गया और पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।