चंद सेकेंड में पूरी रिपोर्ट
डॉ. प्रशांत के अनुसार मरीज को बस थर्मल कैमरे के सामने खड़ा किया जाता है और कुछ सेकेंड में पूरा डेटा कंप्यूटर पर विश्लेषित हो जाता है। इसके बाद एक स्कोर शीट तैयार होती है, जिसमें दर्द, जकड़न, चलने-फिरने की क्षमता, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने, बैठने और उठने की स्थिति जैसी गतिविधियों का मूल्यांकन भी किया जाता है। यह तकनीक एक्स-रे या एमआरआई की जगह नहीं लेती, लेकिन इन जांचों से पहले दर्द की प्रगति को मापने में यह बेहद उपयोगी है।
इस तकनीक के फायदे जानें
नॉन-इनवेसिव, दर्द रहित, बिना रेडिएशन, शुरुआती डायग्नोसिस में बेहतर है। इसमें डॉक्टरों को ऐसे संकेत मिल जाते हैं जो सामान्य जांच में तुरंत नहीं दिखते।
रंग बताएंगे हाल
थर्मल इमेज में रंग शरीर के स्वास्थ्य संकेतों को दर्शाते हैं। लाल-पीला क्षेत्र संभावित सूजन, तनाव या रोग का जोखिम बताता है जबकि हरा-नीला क्षेत्र सामान्य या कम जोखिम को दर्शाता है। यह विजुअल तरीका मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए दर्द की स्थिति को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करता है।