पंजाब में कर्फ्यू खत्म हुआ है लेकिन लॉकडाउन अभी जारी है। शायद ये बात लोग भूल गए हैं। सोमवार को कर्फ्यू हटते ही कई दिनों बाद आम दिनों की तरह जिंदगी पटरी पर लौटती नजर आई। मगर इस दौरान सामाजिक दूरी के नियमों की धज्जियां उड़ीं। बेपरवाह लोग सड़कों पर भीड़ जमा किए नजर आए।
मगर कोई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी रोकने-टोकने वाला नहीं था। बैंकों के बाहर तो सामाजिक दूरी की खूब धज्जियां उड़ीं। गौरतलब है कि सरकार की ओर से कर्फ्यू हटाते ही शहर के सभी हिस्सों में लोगों ने सुबह ही दुकानें खोल दी। दिनभर बाजारों में खूब चहल-पहल दिखाई दी। सोमवार को उन चौक-चौराहों पर भी दुकानें खुली नजर आईं, जहां पिछले कई दिनों से सन्नाटा पसरा था।
मुक्तसर में भी रही जाम की स्थिति।
कोटकपूरा रोड, मलोट रोड, रेलवे रोड, मस्जिद चौक समेत अन्य मुख्य बाजार पहले की तरह लोगों की भीड़ से गुलजार दिखे। शहर के मस्जिद चौक स्थित पंजाब नेशनल बैंक, अबोहर रोड स्थित द ओरिएंटल बैंक समेत शहर के अन्य बैंकों के सामने लोगों की भीड़ भी नजर आई लेकिन सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया गया। उधर, शहर के फाटक पार स्थित बाघला मार्केट व टिब्बी साहिब रोड स्थित कुछ जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा।
इसका कारण प्रशासन की ओर से मनियारी, बूट विक्रेता, कपड़ा व्यापारी समेत अन्य कई दुकानदारों को अभी तक छूट न देना है। जिससे इन लोगों की दुकानें बंद हैं। इन दुकानदारों ने प्रशासन पर एकतरफा नीति का आरोप लगाया और रोष व्यक्त किया। मनियारी, बूट विक्रेता व अन्य दुकानदारों ने भी प्रशासन से कुछ समय के लिए दुकानें खोलने की मंजूरी देने को कहा है, ताकि वे भी इस संकट की घड़ी में अपने कारोबार शुरू कर परिवार का गुजारा चला सकें।
टिब्बी साहिब रोड स्थित बाघला मार्केट के दुकानदार रमनदीप कुमार तथा सुरिंदर कुमार समेत अन्य ने प्रशासन से उन्हें भी दुकानें खोलने के लिए कुछ समय की छूट देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें छूट देता है तो वे इसका नाजायज फायदा नहीं उठाएंगे और नियमों का पालन करते हुए काम करेंगे।
कर्फ्यू हटने के बाद शहर में सोमवार को दुकानें तो खुलीं पर दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते दिखे। आम दिनों में लोगों से खचाखच भरा रहना वाला धोबी बाजार भी सूना था। दो चार वाहन चालकों के अलावा पूरा दिन सन्नाटा छाया रहा। शहर के मुख्य धोबी बाजार में जूते की दुकान करने वाले राजीव ग्रोवर और घड़ी की दुकान वाले संजीव कुमार ने बताया कि कोरोना के कारण लगे कर्फ्यू के बाद उन्होंने दुकानें तो खोल लीं पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं। उनकी दुकानें किराए पर हैं। अब चिंता सता रही कि वो आने वाले समय में किराया और काम करने वाले अपने कर्मचारियों को वेतन कैसे देंगे।