इस बार मेयर चुनाव की जीत और हार कांग्रेस और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है और पूरा खेल क्रॉस वोटिंग पर टिका है। भाजपा-अकाली गठबंधन के पास कांग्रेस के मुकाबले दोगुने वोट हैं, लेकिन बावजूद इसके उन्हें क्रॉस वोटिंग का डर है। ऐसे में भाजपा का प्रयास सिर्फ अपने भितरघात को रोकना होगा।
इसके लिए भाजपा प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद प्रभात झा भी वोटिंग के दिन 8 जनवरी को सदन में ही उपस्थित होंगे। अगर अब भाजपा चुनाव हारती है तो सीनियर नेताओं के साथ साथ पार्टी की काफी किरकिरी होगी।
वहीं कांग्रेस पिछले साल की तर्ज पर भाजपा की क्रॉस वोटिंग करवाकर जीत दर्ज करना चाहती है। कांग्रेस अगर चुनाव जीतती है तो पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कद हाईकमान के सामने काफी बढ़ जाएगा।
दोनों दलों के अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर
इस बार की जीत और हार पर कांग्रेस और भाजपा दोनों के अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है, क्योंकि यह भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन के नेतृत्व में अंतिम चुनाव है।
टंडन के कार्यकाल में पार्टी ने एक भी मेयर चुनाव नहीं जीता है, जबकि कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा के लिए इसलिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है क्योंकि यह उनके नेतृत्व में पहला मेयर चुनाव है।
मनोनीत पार्षदों के संपर्क में दोनों दलों के सीनियर नेता
मनोनीत पार्षदों को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता खुश करने में जुटे हैं। मनोनीत पार्षदों के मोबाइल नंबर राष्ट्रीय नेताओं और मंत्रियों को भेजे गए हैं।
हाल ही में एक केंद्रीय मंत्री की ओर से मनोनीत पार्षदों को नए साल का मैसेज भी आया है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी संपर्क में है कि वह मनोनीत पार्षदों को वोट देने के लिए कहें। जबकि बंसल की ओर से मनोनीत पार्षदों को मैसेज भिजवाया जा रहा है कि वह उनसे अंतिम बार ही वोट मांग रहे हैं।
पार्टी में कोई बिखराव नहीं है। भाजपा-शिअद पार्षद एकजुट हैं। मुझे विश्वास है कि इस बार कुछ भी गड़बड़ नहीं होगा। भाजपा का मेयर बनने के बाद प्रशासन और नगर निगम का कोऑर्डिनेशन अच्छा होगा, जोकि इस समय नहीं है।
-संजय टंडन, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा अध्यक्ष
भाजपा के अपने नेता ही एकजुट नहीं हैं। ऐसे में वह शहर का विकास किस तरह से करवा पाएंगे। मनोनीत पार्षदों का हमारी पार्टी के उम्मीदवारों को ही समर्थन मिलेगा।
-कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा
भाजपा में बौखलाहट है, जबकि उनकी संख्या कांग्रेस के मुकाबले में दोगुनी है। उन्हें पता है कि उनकी पार्टी में भारी भितरघात है, जो उन्हें जीत से दूर रख रहा है। जीत दर्ज करने के लिए तरह-तरह से प्रलोभन दिए जा रहे हैं जो इससे पहले कभी नहीं हुआ है।
-सुभाष चावला, पूर्व मेयर