प्रेमिका के लिए अपनी पत्नी व दो मासूम बच्चों की हत्या करने के आरोपी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी करार दिया है। हत्यारे की सजा का ऐलान मंगलवार को होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर की अदालत ने इस बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड को अति दुर्लभ श्रेणी का माना है।
अब सबकी निगाहें न्यायाधीश के फैसले पर हैं। सोमवार को अदालत परिसर में वकीलों के बीच इसी मामले को लेकर चर्चा होती रही। अधिकतर वकीलों का मानना है कि जिस प्रकार से मासूम बच्चों को मौत के घाट उतारा गया उसे देखते हुए सेशन जज हत्यारे को कड़ी सजा का सुनाएंगी ताकि समाज में एक संदेश जाए।
अभियोजन के अनुसार गांव नथोर निवासी विनोद कुमार सिरसा स्थित एक निजी विद्यालय की स्कूल बस का चालक था। उसके परिवार में उसकी पत्नी सुमन रानी, बेटी रवीना, बेटा सौरव व मुकेश थे। विनोद का विद्यालय में ही कार्यरत एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था लेकिन पत्नी सुमन रानी इससे अनजान थी।
30 नवंबर 2013 को उसने विनोद का मोबाइल फोन लेकर अपने घरवालों से बात की। इसके बाद वह मोबाइल देखने लगी। इसी दौरान उसे पति के मोबाइल पर लंबी कॉल रिकॉर्ड हुई मिलीं। उसने रिकार्डिंग सुनी तो उसके पैर तले जमीन खिसक गई। रिकार्डिंग में उसका पति विनोद अपनी प्रेमिका से रोमांटिक बातें करता सुनाई दिया। प्रेम प्रसंग का राज खुलते ही विनोद का सुमन के साथ विवाद हो गया। प्रेमिका के हासिल करने के चक्कर में उसने पत्नी व बच्चों को मारने की योजना बनाई।
ऐसे दिया हत्याकांड को अंजाम
दो दिसंबर 2013 की शाम विनोद कुमार स्कूल बस लेकर अपने घर पहुंचा। पत्नी सुमन भोजन बना रही थी। इसी बीच मौका मिलते ही विनोद ने सब्जी में नशीला पदार्थ डाल दिया और खुद घर से बाहर चला गया। सुमन ने बेटी रवीना, बेटा सौरव के साथ बैठक खाना खा लिया जबकि छोटा बेटा मुकेश मां का दूध पीकर लेट गया। नशीले पदार्थ के प्रभाव से पत्नी व बच्चे बेहोश हो गए। तीन घंटे बाद जब विनोद घर लौटा तो सभी को बेहोश पाया। उसने पत्नी व बच्चों को बड़े कपड़े में बांधकर बस में डाला। इसके बाद वह बस को इंदिरा गांधी नहर के पास ले गया और पत्नी व बच्चों को नहर में फेंककर उनको मौत के घाट उतार दिया।
लापता होने की दर्ज कराई रिपोर्ट
वारदात के बाद विनोद को अहसास हुआ कि जब गांव वालों को पत्नी व बच्चे दिखाई नहीं देंगे तो बवाल हो सकता है। इसलिए उसने सभी को गुमराह करने की सोची। इसके तहत वह रानियां थाने पहुंचा और पत्नी व बच्चे लापता होने की झूठी रपट दर्ज करवाई। पुलिस ने रपट दर्ज करके जांच शुरू की लेकिन पुलिस को लापता का कोई अता पता नहीं चला। इसी दौरान जांच अधिकारी इंस्पेक्टर रवि खुडियां को किसी से विनोद के प्रेम प्रसंग की बात पता चला। उन्होंने विनोद कुमार को थाने में बुलाकर पूछताछ की। सख्त पूछताछ से विनोद सहम गया और उससे सच्चाई जानकर पुलिस अधिकारी हैरान रह गए। पुलिस ने विनोद के खिलाफ हत्या करने व सबूत मिटाने का मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने राजस्थान केनाल में शवों की तलाश शुरू कर दी। दो दिन बाद पुलिस को सुमन, रवीना व मुकेश का शव मिला। दो साल और तीन महीने तक अदालत में चले इस मामले का निपटारा करते हुए सेशन जज विमलेश तंवर ने विनोद कुमार को हत्याकांड दोषी करार दे दिया।