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गर्भवती नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता पर सत्र न्यायाधीश का ऐतिहासिक फैसला

Wed, 03 Aug 2016 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएस ढांडा की अदालत ने बलात्कार की शिकार नौ सप्ताह की नाबालिग गर्भवती के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। ऐतिहासिक फैसले में बलात्कार की शिकार नौ सप्ताह की नाबालिग गर्भवती को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी है। अदालत ने शहर पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह किशोरी को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ले जाकर उसका गर्भपात करवाए।
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इसी साल 23 मई को यहां एक कॉलोनी में मौसी के घर आई 17 वर्षीय लड़की अचानक गायब हो गई। बाद में पता चला था कि भूना निवासी कुलवंत किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गया है। किशोरी के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 15 जून को धारा 363, 366 के तहत मुकदमा दर्ज किया।

बाद में किशोरी को बरामद कर लिया गया। मेडिकल जांच में बलात्कार की पुष्टि होने पर कुलवंत के विरुद्ध धारा 376 व पोक्सो एक्ट में भी मामला दर्ज कर लिया गया। 
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किशोरी के पेट में दो माह का बच्चा

कोर्ट
अदालत ने किशोरी को नारी निकेतन भेजा लेकिन बाद में किशोरी की अपील पर पिता को सौंप दिया गया था। एक माह बाद मासिक धर्म न आने पर किशोरी के गर्भवती होने का पता चला। पीड़िता की ओर से 26 जुलाई को अदालत में दरखास्त लगाई गई। पीड़िता के वकील ने दलील दी कि किशोरी के पेट में दो माह का बच्चा है।

नाबालिग लड़की बच्चा पैदा करने और बच्चे की परवरिश करने में सक्षम नहीं है। अगर बच्चा पैदा होता भी है तो नाजायज औलाद कहलाएगा और सामाजिक ताने-बाने के चलते वह शादी भी नहीं कर पाएगी। अदालत में खुद पीड़िता ने भी कहा कि उसके परिजन भी गर्भपात के पक्ष में है, इसलिए उसे गर्भपात कराने की इजाजत दी जाए। 

इस बीच अदालत ने अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से गर्भवती नाबालिग का मेडिकल कराने के आदेश दिए। वहां से आई रिपोर्ट में किशोरी के नाबालिग होने की पुष्टि हुई।

इन सबका अवलोकन करने के बाद अदालत ने शहर पुलिस को निर्देश दिए हैं कि नाबालिग किशोरी का अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में गर्भपात करवाया जाए। सोमवार शाम शहर पुलिस किशोरी को गर्भपात करवाने के लिए लेकर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रवाना हो गई।
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