सिरसा में कबीर हत्याकांड को अंजाम देने वाले अंकित व केशव ने वीरवार सुबह जेल में फांसी लगाकर जान दे दी। 15 मार्च को अंकित अपनी मां राजबाला को जेल में देखकर रोने लगा। उसे रोता देख साथी हवालातियों ने उसे चुप करवाया। अंकित को अहसास हुआ कि उसकी करतूतों से उसकी मां को जेल का मुंह देखना पड़ा है। मां को जेल की सलाखों के पीछे देख वह खुद शर्मसार था।
16 मार्च को वह दोस्त केशव के साथ काफी देर तक जेल में बने मंदिर के सामने बैठा रहा। शाम बैरक में चर्चा होने लगी कि यूपी पुलिस उन्हें गाजियाबाद में हुई हत्या के मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार करने आएगी। अंकित व केशव ने कबीर की हत्या के एक सप्ताह पहले यानी 23 जनवरी को गाजियाबाद में लूट के इरादे से अंकित की बुआ संतोष की हत्या हुई थी। यह बात जानकर दोनों ज्यादा हताश हो गए।
अंकित व केशव रातभर सोये नहीं और वीरवार सुबह वार्डन ने जैसे ही बैरकों को खोला तो दोनों ओढ़ने वाली एक चादर लेकर पार्क में टहलने लगे। इसके बाद दोनों दोस्त स्कूल में पहुंचे और लाइब्रेरी रूम में जाकर बैठ गए। लाइब्रेरी से अन्य हवालाती चले गए तो अंकित व केशव ने पहले चादर को फाड़ कर दो टुकड़े कर लिए। दोनों ने गेट को बंद करके उसके आगे गमला रख दिया ताकि एकदम से कोई अंदर न आ सके।
इसके उपरांत अलग-अलग पंखे के नीचे कुर्सियां लगाई और चादर से पंखे पर फंदा डालकर अंकित व केशव ने खुद को फांसी लगा लगी। एक हवालाती ने लाइब्रेरी रूम का गेट खोला तो सामने का दृश्य देखकर आंखें फटी की फटी रह गई। शोर मचाने पर बैरकों में बैठे हवालाती व कैदी भाग कर स्कूल में पहुंचे। घटना का पता चलने पर वार्डन से लेकर जेल अधीक्षक जेएस सेठी सन्न रह गए।
जेल में बंद अंकित की मां राजबाला को जब पुत्र की मौत का पता चला तो वह फूट-फूट कर रोने लगी। जेल अधिकारियों ने राजबाला को बताया कि अंकित व उसके दोस्त केशव ने फांसी लगा ली है। हुडा चौकी प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि मृतकों के परिजनों का बयान दर्ज करके इस मामले में 176 के तहत कार्रवाई की गई।