प्राथमिक जांच के अनुसार, डीजीपी ने कहा कि यह पता चला है कि तीनों आरोपी लखबीर लंडा के सीधे संपर्क में थे और बड़े पैमाने पर हथियारों, विस्फोटकों और ड्रग्स की जबरन वसूली और सीमा पार से तस्करी में शामिल थे।
तरनतारन के एसएसपी रंजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि विश्वासनीय सूचना के बाद सरहली थाने की पुलिस टीम ने नाका चलाया और उनके कब्जे से दो पिस्टल बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में नछत्तर सिंह के खुलासे पर पुलिस टीमों ने तरनतारन के रतटोक गांव के बाहर छिपा रखी गई आईईडी भी बरामद की है।
नेटवर्क में 50 गुर्गे शामिल, 25 की पहचान हुई
एसएसपी ने कहा कि लंडा-रिंदा गिरोह का लगभग 40-50 गुर्गों का नेटवर्क है। इनमें से 25 गुर्गों की पहचान कर ली गई है और उन्हें पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि आगे की जांच जारी है और हथियारों व विस्फोटकों की और बरामदगी की उम्मीद है।
इन धाराओं में दर्ज किया गया मामला
सभी के खिलाफ तरनतारन के थाना सरहली में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 389, धारा 25(6), 26(7)(i), विस्फोटक अधिनियम की धारा 4 और 5 और एनडीपीएस अधिनियम की 21, 31-59-85 के तहत दर्ज किया गया है।
लंडा कौन है?
लखबीर सिंह लंडा (33) तरनतारन का रहने वाला है। वह 2017 में कनाडा भाग गया था। उसने ही मोहाली में पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस मुख्यालय पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) आतंकी हमले की साजिश रची थी। वहीं अमृतसर में सब-इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह की कार के नीचे एक आईईडी भी उसी के कहने पर लगाई गई थी। उसे पाकिस्तान स्थित वांछित आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा का सहयोगी माना जाता है।