सदर थाने के अधीन पड़ते गांव तेजा में डेरे की जमीन के विवाद को लेकर बेटे ने मां की ललकार पर अपने महंत पिता और बड़े भाई की गोली मार कर हत्या कर दी। यह सनसनीखेज वारदात पंजाब के पटियाला में घटी।
वारदात को अंजाम देने में लड़के का साथ मां श्मशेर कौर, उसके कथित प्रेमी चतर सिंह, लड़के की पत्नी पाल कौर, नौकर मीहां सिंह ने दिया। सभी के खिलाफ सदर थाना पुलिस ने खबर लिखे जाने तक हत्या और आर्म्स एक्ट का केस दर्ज कर लिया था। किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
पटियाला में किला चौक के पास मोहल्ला नौदां मिश्र के रहने वाले महंत निर्मल दास (70) का अपनी तलाकशुदा पत्नी श्मशेर कौर, छोटे लड़के अछर सिंह के साथ गांव तेजा में पड़ती डेरे की करीब 22 किला जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। हाल ही में निर्मल दास कोर्ट से डेरे की इस जमीन का केस जीत गए थे।
इसके बाद वह अपने बड़े बेटे जितेंद्र दास (50) जो पत्नी के साथ तलाक के बाद उनके साथ ही रह रहा था। उसके साथ व उसकी पत्नी रमन और बेटे की छोटी लड़की पूनम के साथ इस जमीन पर कब्जा लेने के लिए गांव तेजा गए थे। महंत निर्मल दास गांव के सरपंच भी थे।
मां की ललकार पर सिर में मारी गोलियां
जैसे ही यह सभी लोग विवादित जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे, तो उस जमीन पर ही घर बनाकर रहने वाली निर्मल दास की तलाकशुदा पत्नी श्मशेर कौर ने अपने कथित प्रेमी चतर सिंह, बेटे अछर सिंह, नौकर मीहां सिंह को ललकार दी, कि आज इन लोगों को ऐसे ही जाने नहीं देना।
इसके बाद 32 बोर की रिवाल्वर और पिस्टल से लैस अछर सिंह, चतर सिंह ने निर्मल दास पर गोलियां चला दीं। गोलियां सिर में लगने से मौके पर ही निर्मल सिंह की मौत हो गई।
फिर जितेंद्र दास के गोलियां मारी, जो उसके सिर में लगीं और उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान नौकर मीहां सिंह ने लाठियों से महंत व लड़के जितेंद्र दास पर वार किए।
खबर लिखे जाने तक सदर थाना पुलिस ने आरोपी छोटे लड़के अछर सिंह, मां श्मशेर कौर, अछर की पत्नी पाल कौर, नौकर मीहां सिंह, मां के प्रेमी चतर सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था।
पुलिस मौजूद होती, तो बच जाती जान
पटियाला के गांव तेजा में सोमवार दोपहर को जमीनी विवाद में हुए पिता-पुत्र के कत्ल को रोका जा सकता था, अगर मौके पर पुलिस मौजूद होती। जब मरने वाला जितेंद्र दास गांव में अपनी 22 किला एग्रीकल्चर लैंड पर कब्जा लेने के लिए गया था। मृतक जितेंद्र दास के परिजनों ने रोते-रोते हुए अमर उजाला को बताया कि कोर्ट से जमीन का कब्जा लेने के वक्त पुलिस सुरक्षा मांगी गई थी, लेकिन मिली नहीं।