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इंडो-पाक बॉर्डर पर विदेशी महिला के साथ छेड़छाड़

Sun, 28 Jun 2015 08:53 AM IST
विनय कोछड़/अमर उजाला, अमृतसर
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पंजाब के अमृतसर में पाकिस्तान बॉर्डर पर विदेशी महिला से छेड़छाड़ और शारीरिक प्रताड़ना का मामला सामने आया है। घटना 25 जून की है। महिला गुरु नानक देव अस्पताल के मेडिकल वार्ड नं. 4 में उपचाराधीन है।
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महिला काफी डरी हुई है और कोई भी उसके पास आता है तो रोते हुए ‘डोंट टच मी’ की गुहार लगाने लगती है। अगर कोई पुलिस अधिकारी या फिर डॉक्टर उसका हालचाल जानने के लिए आता है तो उन्हें मारने लगती है।

28 साल की महिला महाराष्ट्र की एक कंपनी एसीएमई मशीनरी इंडिया प्राइवेट लि. में 19 जून को बिजनेस दौरे पर आई थी। वहां काम निपटाकर 25 जून को अमृतसर घूमने आई। श्री हरमंदिर साहिब और जलियांवाला बाग के बाद वह वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी देखने के बाद पाकिस्तान बॉर्डर पर चली गई।
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पाकिस्तानी बॉर्डर के अधिकारियों ने की छेड़छाड़

जानकारी के अनुसार पाकिस्तान बॉर्डर के अधिकारियों ने उसे पाकिस्तान में आने से इंकार कर दिया। उसके बाद वहां के अधिकारियों ने उसे पानी पिलाया, जिसके बाद उसके साथ छेड़छाड़ की और भारत भेज दिया। सारी रात वह जीरो लाइन पर घूमती रही। सुबह जब भारत के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट चेक किया तो वह बेहोश हो गई।

होश में आने के बाद जब बीएसएफ अधिकारियों और अटारी के तहसीलदार अमरजीत सिंह, एसएचओ घरिंडा रविंदर सिंह ने उसके बारे में जानने की कोशिश की तो उसने कुछ नहीं बताया। हालत ठीक न होने के कारण उसे 26 जून की रात को गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल कराया गया।

शनिवार दोपहर जब उसे होश आया तो उसने अपनी देखभाल कर रहे दो कर्मचारियों के साथ बुरा व्यवहार शुरू कर दिया। जब अस्पताल के डॉक्टर उसका चेकअप करने आए तो उसने डोंट टच मी कहकर उन्हें मना कर दिया।
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इलाज के लिए गठित की गई विशेष टीम

प्रशासनिक अधिकारियों को टिवाला के पासपोर्ट से पता चला कि उसे 27 जून को अपने देश वापस जाना था। पीड़िता की जांच कर रहे सीनियर डॉक्टर डॉ. निरंकार सिंह नेकी ने बताया कि उसके टेस्ट के लिए विशेष डॉक्टरों की टीम गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद मरीज को उसी हिसाब से ट्रीटमेंट किया जाएगा।

डॉ. नेकी ने बताया कि जब शुक्रवार रात को मरीज को वार्ड में शिफ्ट किया गया तब उसकी हालत काफी दयनीय थी। वह बेहोश थी और किसी से बातचीत नहीं कर रही थी शनिवार सुबह 11 बजे उसने अटेंडेंट परमजीत कौर से पानी मांगा। दो बूंद पीकर वह फिर सो गई। दो दिन में उसने खाने में कुछ नहीं लिया है। उसे ग्लूकोज लगाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर का मामला होने के बावजूद जिलाधीश प्रदीप सभरवाल पीड़िता का हालचाल पूछने अस्पताल नहीं पहुंचे। उन्होंने अपने दफ्तर के एक कर्मचारी को अस्पताल में पीड़िता का हाल जानने भेजा था। 
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