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सुनैना हत्याकांडः कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Fri, 27 Feb 2015 05:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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2009 में देशभर में चर्चित पंजाब के सुनैना हत्याकांड में एडिशनल सेशन जज हरवीन कौर ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मामले में दो भाइयों समेत पांच युवकों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
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एडिशनल सेशन जज हरवीन कौर ने दुराचार की धारा 376 के तहत रोहित निवासी लसूड़ी मोहल्ला, पंकज सिंह भीमा निवासी सतनाम नगर, संदीप कुमार सैंडी निवासी बस्ती दानिशमंदा को 20-20 साल की सजा सुनाई और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना किया। अदालत ने पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने के भी आदेश दिए।

दुराचार के बाद हत्या करने में धारा 302 के तहत रोहित, पंकज भीमा, संदीप सैंडी के अलावा रोहित के भाई रमेश और जगदीप सिंह बिल्ला को ताउम्र कैद की सजा सुनाई। शव को खुर्द-बुर्द करने में धारा 201 के तहत सात-सात साल की सजा सुनाई गई।
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पुलिस रिकार्ड के मुताबिक मामला 10 नवंबर 2009 का है। रोहित ने घर लौट रही सुनैना को रोका और पंकज सिंह भीमा, सैंडी के साथ उसको नजदीकी मकान में ले गया। वहां उसके साथ दुराचार किया गया। बाद में रमेश काकू और जगदीप बिल्ला को बुलाया गया। रमेश अपने रिश्तेदार की कार को लेकर आया और पांचों युवक सुनैना को लेकर खाली प्लाट में चले गए। वहां पर सुनैना की गला घोंटकर हत्या कर दी गई और शव को केरोसिन डालकर जला दिया। पांचों ने वहां पर शराब भी पी।
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सहेली से मिलने गई, घर वापस नहीं लौटी

सुनैना जालंधर के बस्ती दानिशमंदा की रहने वाली थी। 15 साल की सुनैना उस दिन अपनी सहेली से मिलने के लिए घर से निकली लेकिन वापस नहीं लौटी। उसकी सहेली का कहना था कि सुनैना उसके घर आई जरूर थी लेकिन वह वापस चली गई थी। अगले दिन ग्रीन पार्क इलाके से सुनैना का जला हुआ शव मिला, जिसके पास केरोसिन पड़ा था।

उसके गले में तार भी लिपटी हुई थी। पास में पांच खाली गिलास, शराब की खाली बोतल और नमकीन का पैकेट पड़ा हुआ था। सुनैना की दुराचार के बाद हत्या की पुष्टि हुई थी। सुनैना के शरीर पर गहरे घाव भी थे। बावजूद इसके पुलिस ने अनट्रेस केस कोर्ट में फाइल कर दिया था। इसमें कई लोगों को तफ्तीश में शामिल किया गया था लेकिन पुलिस का तर्क था कि केस में शामिल किए गए आरोपियों का कोई दोष नहीं है।

हाईकोर्ट की फटकार पर जागी थी पुलिस
सुनैना की मां ने 2012 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि केस में पुलिस सही ढंग से तफ्तीश नहीं कर रही है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश दया चौधरी के समक्ष दायर याचिका में उन्होंने मामले की जांच जालंधर से बाहर करवाने के लिए कहा। उन्होंने यह भी मांग की कि इस केस की जांच का जिम्मा एसपी या किसी आईपीएस अधिकारी को दिया जाए। जस्टिस दया चौधरी ने केस में डीजीपी को तलब कर हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर करने के लिए कहा।

दबाव में आई पुलिस ने तत्काल तीन सदस्यीय पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन कर दिया। एसआईटी के गठन को पांच दिन ही हुए थे कि पुलिस ने केस में पांच आरोपियों को काबू कर लिया। पुलिस ने रमेश, रोहित (दोनों भाई), जसदीप बिल्ला, संदीप सैंडी और भीमा को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी को केस में तफ्तीश के दौरान भी शामिल किया गया था लेकिन उनको क्लीन चिट मिल गई थी।
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