कर्ज के बोझ से परेशान किसान ने वीरवार को पेड़ पर फंदा लगा कर अपनी जान दे दी। कृषि लागत में लगातार बढ़ोतरी और बच्चों की महंगी हो रही शिक्षा के चलते कर्ज के बोझ तले दबता ही चला गया। जब वह कर्ज के चक्रव्यूह से निकलने में कामयाब न हुआ तो गांव से दूर पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
जानकारी के अनुसार नवा डल्ला निवासी मुख्तियार सिंह अपनी करीब चार एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार पालता था। पिछले कई साल से महंगी हो रही खाद, कीटनाशक और बीज इत्यादि के कारण उसका गुजारा मुश्किल हो गया था। परिवार चलाने और कृषि के लिए उसने बैंक एवं आढ़ती से कर्ज लिया।
उसका सपना था कि नौ साल का बेटा जसकरण सिंह और पंद्रह साल की बेटी अच्छी शिक्षा हासिल करके जीवन में मुकाम हासिल करें लेकिन लगातार कर्ज से हालत बदतर होती चली गई।
वीरवार शाम मुख्तियार सिंह अचानक घर से अपने मोटरसाइकिल पर गांव डल्ला से अखाड़ा नहर के साथ घने पेड़ों के पास पहुंच गया। उसने शहतूत के पेड़ से परना बांध कर फं दा लगा लिया। मुख्तियार के काफी देर तक घर न आने के कारण परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। परिवार के सदस्यों को उसकी पेड़ से लटकती लाश मिली।
इसकी जानकारी थाना हठूर को दी गई। थाना प्रभारी शिवकंवल सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव को कब्जे में लेकर जगरांव के सिविल अस्पताल में रखवा दिया।
घटनास्थल पर खड़े मृतक के मोटरसाइकिल की डिग्गी से पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद किया। इसमें किसान ने लिखा था कि वह कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर रहा है और अपनी मौत का खुद जिम्मेदार है। इसके लिए उसके परिवार को तंग न किया जाए।