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पंजाब में सामने आया करोड़ों का घोटाला

Mon, 10 Nov 2014 03:13 PM IST
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा
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माल विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जमीनों की बेच खरीद के दौरान करोड़ों रुपये की स्टांप फीस चोरी कर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है।
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महालेखाकार, पंजाब की टीम की तरफ से स्थानीय तहसील कार्यालय के किए गए ऑडिट के दौरान यह घोटाला बेनकाब हुआ है। ऑडिट टीम की इस रिपोर्ट पर इंस्पेक्टर जनरल आफ रजिस्ट्रेशन पंजाब, जालंधर ने सरकार को हुए वित्तीय नुकसान के लिए एक नोटरी वकील समेत पांच वसीका नवीसों को नोटिस जारी किया है।

पंजाब सरकार की ताजा हिदायतों के मुताबिक रजिस्ट्री में गलत तथ्य दर्ज कर तसदीक करवाने के आरोप में खरीदने और बेचने वालों को सात साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
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मिलीभगत से हो रही थी चोरी

जानकारी के अनुसार रजिस्ट्रियां तसदीक करवाते समय वसीका नवीस कलेक्टर रेट का गलत कोड और रिहायशी क्षेत्र को गैर रिहायशी दर्ज कर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचा रहे हैं। कलेक्टर रेट का गलत कोड दर्ज करने से सरकार को वित्तीय नुकसान हो रहा है वहीं लोगों की भी लूट हो रही है।

पंजाब सरकार की तरफ से अपने वंश से बाहर के व्यक्ति को जमीन बेचने संबंधी पावर ऑफ अटॉर्नी देने पर लगाई पाबंदी के बावजूद लुधियाना और अन्य शहरों के निवासियों को स्थानीय शहर का निवासी बता कर धड़ल्ले से पावर ऑफ अटॉर्नी रजिस्टर कर सरकार को मिलने वाली स्टांप फीस का रगड़ा लगाया गया है।

यह सब कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन पंजाब जालंधर ने महालेखाकार पंजाब की टीम की तरफ से किए ऑडिट का हवाला देते हुए एक नोटरी पब्लिक समेत पांच वसीका नवीसों को स्टांप फीस चोरी के अंतर्गत जिम्मेदार ठहराया है और नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है।
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चोरी पर कैद और जुर्माने का प्रावधान

एक अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रियां तसदीक करवाते समय सही जानकारी नहीं दी जाती। कलेक्टर कोड या एरिया बदल कर कम रेट वाला कोड रजिस्टरी में दर्ज करने और तथ्यों को छुपा कर रजिस्ट्री तसदीक करवाने को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार के माल, पुनर्वास और डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग (स्टांप और रजिस्ट्री ब्रांच) की तरफ से जारी ताजा हिदायतों के मुताबिक रजिस्ट्री में कलेक्टर रेट और एरिया कोड आदि ठीक दर्ज होने के बारे में अंडरटेकिंग ली जा रही है।

उन्होंने कहा कि इन हिदायतें में यह भी लिखा गया है कि गलत तथ्य दर्ज कर रजिस्ट्री तसदीक करवाने के आरोप में खरीदने और बेचने वालों को सात साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
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