घटना की जांच करने पहुंची टेक्नीकल टीम।
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चंडीगढ़ से अंबाला तक भयंकर होता मंजर
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हजारों लीटर पेट्रोल से भरी मालगाड़ी की 50 बोगियों में अगर आग लगती तो इसका असर कई किमी. तक होता। लालड़ू से अंबाला करीब 20 किमी दूर है। डेराबस्सी 10 किमी के दायरे में है और जीरकपुर 20 से 25 किमी तक पड़ता है। ऐसे में चंडीगढ़ भी 30 किमी के दायरे में आता है। ऐसे में स्वाभाविक था कि अगर ऐसा हादसा होता तो अंबाला से लेकर चंडीगढ़ तक इसका मंजर भयंकर होता।
हवा में लटके बोगियों के पहिए।
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हवा में लटक गए बोगियों के पहिए
पेट्रोल के 50 डिब्बों के लेकर जा रही मालगाड़ी के पांच से छह डिब्बे रेल ट्रैक से नीचे उतर गए। बोगियों के पहिए हवा में लटक गए थे। अगर एक भी डिब्बा पलट जाता तो तुरंत पेट्रोल आग पकड़ लेता और फिर एक के बाद एक पेट्रोल से भरे डिब्बों में धमाके होते। इससे एक साथ कई गांव और शहर भी तबाह हो जाते। क्योंकि जहां ये हादसा हुआ वहां से हरियाणा और पंजाब की सीमा लगती है। ऐसे में हरियाणा के अंबाला और पंजाब के लालड़ू, डेराबस्सी, जीरकपुर और यहां तक की धमाकों से राजधानी चंडीगढ़ भी दहल जाती। धमाकों की गूंज और इसकी आग से कई जिंदगियां तबाह हो सकती थी।
पटरी से उतरी मालगाड़ी की बोगियां।
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दोपहर दो बजे हुआ हादसा
अंबाला-कालका रेलवे मार्ग पर लालडू़ के वीरवार दोपहर 2 बजे यह बड़ा हादसा होने से टल गया। लालड़ू रेलवे स्टेशन के पास हजारों लीटर पेट्रोल भरी मालगाड़ी की 6 बोगियां पटरी से उतर गई। गनीमत रही कि बोगी पलटी नहीं, ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर अंबाला से रेलवे अधिकारी पहुंच गए हैं। ट्रेन की बोगियां ट्रैक से उतरने की वजह से अंबाला कैंट की तरफ से चंडीगढ़ की तरफ जाने वाली ट्रेनें बीच रास्ते फंस गई। लखनऊ व पश्चिम एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों को रास्ते में ही रोक दिया गया, जिस वजह से यात्रियों को परेशान होना पड़ा।
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