वहीं, लॉरेंस बिश्नोई ने चंडीगढ़ पुलिस के प्रोडक्शन वारंट पर आने से बचने के लिए पहले ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। उसने कोर्ट को बताया कि 31 मई 2020 को यूटी पुलिस ने आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस उसका प्रोडक्शन वारंट हासिल करना चाहती है लेकिन उसे शक है कि कानपुर मुठभेड़ में जैसे विकास दुबे को मारा गया, वैसे ही उसका फर्जी एनकाउंटर हो सकता है।
लिहाजा, उसके हाथ-पैर बांधकर लाया जाए, ताकि पुलिस भागने की कोई कहानी न बना सके। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रोडक्शन के दौरान लॉरेंस को कड़ी सुरक्षा में लाया जाए और वीडियोग्राफी करवाई जाए। इसके बाद लॉरेंस प्रोडक्शन वारंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
वहां से हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन मिल गया। इस पर चंडीगढ़ पुलिस को जवाब दायर करने के लिए कहा गया था। पुलिस ने भी कोर्ट में कहा कि लॉरेंस को वीडियोग्राफी कर कड़ी सुरक्षा में लाया जाएगा। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई इस समय राजस्थान की अजमेर जेल में बंद है। पुलिस मामले में अब साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रही है।
सोशल मीडिया पर धमकी देना और घटना के बाद उसकी जिम्मेदारी लेने का प्रचलन तो चंडीगढ़ में काफी दिनों से चल रहा है लेकिन पहली बार किसी मामले में सीधे एसएसपी को धमकी दी गई है। पुलिस जांच में जुटी है कि यह असली आईडी है या फर्जी। साथ ही इसके संचालन के बारे में भी पुलिस जांच कर रही है।
सोशल मीडिया पर रोक लगाने के दावे बेदम
पुलिस ने कुछ दिन पहले अपराधियों के सोशल मीडिया अकाउंट को बंद करने का दावा किया था लेकिन गैंगस्टर लगातार सोशल मीडिया पर धमकी दे रहे हैं और हमले की जिम्मेदारी ले रहे हैं। हाल ही में अंबाला में हुए हत्याकांड की जिम्मेदारी भी गैंगस्टरों ने सोशल मीडिया पर ली थी। पुलिस पूरी ताकत झोंकने के बाद भी इन अकाउंट को बंद नहीं कर पा रही है।
इस तरह की धमकियां मिलती रहती हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी की धमकी से लॉरेंस को चंडीगढ़ न लाया जाए, यह संभव ही नहीं। लॉरेंस को चंडीगढ़ लाकर विभिन्न मामलों में पूछताछ जरूर होगी। - कुलदीप चहल , एसएसपी, यूटी पुलिस।