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AIPMT पेपर लीक: ऐसे खेला जाता था शातिर खेल

Tue, 05 May 2015 10:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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एआईपीएमटी पेपर लीक करने के आरोपियों ने एक अजीब ही खेल का खुलासा किया है। रोल नंबर मिलने के साथ ही इस गैंग को पता चल जाता था कि परीक्षार्थी के पास कौन सी सीरीज का पेपर आने वाला है।
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आरोपियों ने इसके लिए पूरा गुणा गणित का एक सेट फार्मूला तैयार कर रखा है। वे रोल नंबर के अंत के 3 नंबरों को 4 से भाग कर देते थे। इसके बाद जो अंक बचता था, उससे अंदाजा लग जाता था कि परीक्षार्थी के पास कौन सी सीरीज का पेपर आया है।  

कुछ ऐसे समझें इस फार्मूले को
मान लिया एक अभ्यर्थी कमल का रोल नंबर 23478945 है। रोल नंबर के अंतिम तीन अंक 945 हैं। 945 को 4 से भाग कर दें। इसके बाद शेष बचेगा 1 अर्थात कमल के पास ए सीरीज का पेपर आया है।
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इसी तरह अपने परीक्षार्थियों के रोल नंबर को गुणा भाग कर वे सीरीज का पता लगा लेते थे। हालांकि कई बार उनकी परेशानियां भी बढ़ जाती थी कि सीटिंग प्लान बदल जाता है।

2 लड़कियां व 7 लड़के थे कैंडीडेट
सामने आया है कि तीन अलग-अलग लोगों के  कुल 9 कैंडीडेट थे। इनमें दो लड़कियां और 7 लड़के शामिल हैं। इनमें राजेश के पास गोहाना के दो ग्राहक थे, जिनमें एक लड़की और एक लड़का था।

डा. भूपेंद्र सांगवान के 3 ग्राहक थे, जिनमें एक हिसार, एक गोहाना और करनाल की लड़की शामिल थी। रवि के पास कुल 5 कैंडीडेट थे जिनमें पांचों लड़के  थे और उनमें एक-दो जयपुर के भी हैं।

एक खांसी पर मिलता था सवाल का जवाब

एआईपीएमटी का पेपर लीक होने के खेल के खुलासे में कई और चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। गिरोह के मास्टर माइंड की ओर से आंसर-की पहुंचने और पेपर होने का खेल हाईटेक टेक्नोलॉजी पर चलता था। टेक्नोलॉजी भी ऐसी कि पुलिस भी हैरान है। आरोपियों के कब्जे से माइक्रो चिप, ब्लू टूथ डिवाइस, डिजिटल वॉच बरामद की हैं।

ये अंडर गारमेंट में छुपा कर रखी गई थीं और उन्हें इस तरह से फिट कर रखा था कि जल्दी से किसी के हाथ न लग पाएं। सारा सिस्टम पूरी तरह कोड पर आधारित था। यह कोड केवल परीक्षार्थियों व उनके एजेंटों के बीच ही पता रहता था। पेपर में बैठने के बाद परीक्षार्थियों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती थी।

परीक्षार्थियों की एक खांसी से बाहर बैठे उनके एजेंटों को पता लग जाता था कि उनके पास कौन सी सीरिज का पेपर आया है और कौन सी आंसर-की भेजनी है। इसके बाद वे अपने व्हाट्स एप से आंसर-की भेजना शुरू कर देते हैं। की पहुंचने के बाद परीक्षार्थियों के पास आंसर भेजना शुरू कर देते थे।

बाहर से एक खांसी का मतलब होता था ‘ए’, 2 खांसी का मतलब ‘बी’, 3 खांसी का मतलब ‘सी’ और 4 खांसी का मतलब ‘डी’। ऐसे में परीक्षार्थी को बोलने की जरूरत नहीं पड़ती।

8 से 12 हजार रुपये का है सेट

आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने अंडर गारमेंट के सेट बरामद किए हैं। इन सेट की खरीदारी आरोपियों ने दिल्ली के पटेल नगर से की। एक-एक सेट की कीमत 7 से 12 हजार रुपये के बीच है। इन्हें ब्लू टूथ गारमेंट के नाम से जाना जाता है।

ऐसे होता है टेक्नोलॉजी का प्रयोग
आरोपियों ने खुलासा किया कि अपने परीक्षार्थी को पहले ही तैयार किया जाता था। इसके लिए उन्हें बाकायदा ड्रेस दी जाती है। इसमें महिलाओं के अंडर गारमेंट भी शामिल हैं। इनमें ब्लू टूथ चिप लगी होती है। इसे अंडर गारमेंट में इस तरह फिट कर दिया जाता है कि जल्दी से हाथ लगाने पर भी एहसास नहीं होता।

एक महीन सी तार से इस ब्लू टूथ को दूसरे डिवाइस से जोड़ दिया जाता है। उसमें माइक्रो चिप लगी होती है। साथ ही घड़ी में डिजिटल कैमरा लगा होता है और कान में ब्लू टूथ डिवाइस। इन चारों को आपस में कनेक्ट कर पूरा पेपर सोल्व कर दिया जाता है।
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पेपर से आधा घंटा पहले मिले आंसर

आरोपियों के मोबाइल पर पेपर शुरू होने से आधा घंटा पहले 10 बजे से आंसर की आनी शुरू हो गई। एक-एक करके चारों आरोपियों के मोबाइल पर अलग-अलग ग्रुप की आंसर की आई।

यह आंसर की मास्टर माइंड रूप कुमार दांगी की ओर से व्हाट्सएप पर भेजी गई। यह आंसर की उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में फैले इनके साथियों के पास भी भेजी गई हैं। यह पेपर राजस्थान में सॉल्व किया गया और वहीं से सभी को भेजा गया है।
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