जिला पुलिस ने एआईपीएमटी के पेपर लीक के खेल का खुलासा भले ही कर दिया है, लेकिन उसके मास्टर माइंड तक पहुंचना चुनौती है।
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शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पिछले सीजन में ही दांगी ने 15 करोड़ रुपये का कारोबार किया था और इस बार उसका टारगेट बड़े खेल का था। शायद ही कोई पेपर ऐसा होगा जिसे वह लीक नहीं करवाता।
एक बड़ी खासियत ये है कि वह अपने ही लोगों से बहुत कम मिलना पसंद करता है। मास्टर माइंड ने राजस्थान से बैठकर यूपी और उत्तराखंड तक अपने नेटवर्क को फैला रखा था।
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50 लाख रुपये में हो जाता है पेपर लीक
सूत्रों के अनुसार आरोपी का पेपर लीक करवाने का तरीका भी बड़ा शातिर है। इस सारे खेल की जिम्मेदारी मास्टर माइंड की ही होती है। वह ऐसे प्राइवेट स्कूल देखता है, जिनमें परीक्षा केंद्र होता है।
मास्टर माइंड किसी भी स्कूल के प्रिंसिपल अथवा हेडमास्टर से संपर्क कर उनसे सौदा करता है। उन्हें 40 से 50 लाख रुपये का लालच देकर पेपर लीक करने की बात करता और साथ ही ये भी लालच देता है कि दो-तीन परीक्षार्थी वे खुद भी पकड़ लें और उन्हें पास करवाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
ऐसे में एक स्कूल मालिक अथवा प्रिंसिपल को बैठे बिठाए एक-डेढ़ करोड़ रुपये तक की कमाई हो जाती है और मास्टर माइंड का काम हो जाता। सूत्रों के अनुसार इस तरह का पूरा काम यूपी व बिहार से ज्यादा आसानी से हो जाता है।
पेपर कहीं से लीक हो, सोल्व होता है राजस्थान में
आरोपियों ने ये भी खुलासा किया है कि मास्टर माइंड का मुख्य काम पेपर लीक करवाकर उसका सोल्यूशन करवाना है। इसके लिए वह राजस्थान में जाकर बैठ जाता है। वहीं पर उसने सबसे ज्यादा सेटिंग की हुई है और पेपर लीक करवाकर वहां से अपने किसी एक साथी के मोबाइल पर बता देता है।
इसके बाद वह किसी से संपर्क नहीं करता। उसने इस बार भी 22 अप्रैल से अपने साथियों से संपर्क बंद कर दिया था। खास बात ये है कि पकड़े गए आरोपियों के पास सारे खेल में पैसा नकद नहीं आया बल्कि पैसा पेपर का रिजल्ट आने पर ही आता है।
पेपर वाले दिन ही लीक हो गया था पेपर
ऑल इंडिया प्री मेडिकल एग्जामिनेशन टेस्ट (एआईपीएमटी) का तीन मई को हुआ पेपर लीक हो गया था। पेपर पास कराने का सौदा 20-20 लाख में हुआ। इसका खुलासा हरियाणा पुलिस ने सोमवार को किया। पेपर लीक कराने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, हालांकि इस पूरी कड़ी का मास्टरमाइंड रूप कुमार दांगी अब भी गिरफ्त से दूर है।
पकड़े गए आरोपियों में से दो बीडीएस डॉक्टर, एक एमबीबीएस छात्र व एक अन्य व्यक्ति है। पूछताछ में पुलिस को इनसे फिलहाल नौ परीक्षार्थियों के रोल नंबर पुलिस को मिले हैं जिनका रोहतक में पेपर होना था। यह लोग पेपर दे पाए हैं कि नहीं इसकी जांच जारी है।
इसके साथ ही पुलिस को यह भी पता चला है कि इन्होंने देशभर में करीब 200 परीक्षार्थियों को पास कराने का सौदा किया गया था। पानीपत के एक होटल में पेपर लीक कराने की रूपरेखा तैयार की गई थी। पकड़े गए चारों आरोपियों से मोबाइल फोन, युवक-युवतियों के अंडर गारमेंट्स (जिनमें ब्लूटूथ सहित अन्य हाईटेक उपकरण फिट थे) सहित अन्य सामान बरामद किया गया है।
चारों आरोपियों को अदालत ने चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है। रोहतक रेंज के आईजी श्रीकांत जाधव के अनुसार तीन मई को हुए एआईपीएमटी के पेपर को लीक कराने के लिए कुछ लोग 30 अप्रैल को पानीपत के एक होटल में मीटिंग कर रहे थे।
इसकी सूचना पर कुछ मोबाइल नंबर ट्रेस पर लगाए गए तो उनकी लोकेशन रोहतक में मिली। जांच में जुटी स्पेशल टीमों ने चार युवकों को ओमेक्स सिटी, झज्जर बाइपास के पास से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए आरोपियों में बीडीएस डॉ.भूपेंद्र सांगवान निवासी गुढ़ाना, भिवानी, डॉ.संजीत निवासी बसंत विहार रोहतक, पीजीआई रोहतक में एमबीबीएस छात्र रवि निवासी गांव निमका, ग्रेटर नोएडा, यूपी और राजेश निवासी गद्दीखेड़ी शामिल हैं। सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, षड्यंत्र रचने और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।