समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले के अभियुक्त स्वामी असीमानंद की जमानत अर्जी पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनआईए कोर्ट पंचकूला में अब तक दर्ज गवाहों के बयान तलब कर दिए हैं।
इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में दाखिल दोषपत्र की प्रति भी मांगी है। असीमानंद के वकील सत्यपाल जैन ने हैदराबाद बम ब्लास्ट में असीमानंद के दो सहअभियुक्तों को आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जमानत प्रदान करने का हवाला देते हुए कहा कि असीमानंद को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता है।
उसके खिलाफ समाझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट के लिए केवल राशि मुहैया कराने का आरोप है। सुनवाई 30 जुलाई के लिए स्थगित कर दी गई है।
असीमानंद की जमानत में एनआईए ने समय मांगा
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में जेल में बंद स्वामी असीमानंद की जमानत अर्जी पर एनआईए ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय देने की मांग की है। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिका पर हाईकोर्ट के जस्टिस एसके मित्तल की एकल बेंच ने पिछली सुनवाई पर नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था।
असीमानंद के खिलाफ समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में एनआईए ने पंचकूला की अदालत में दोष पत्र दाखिल किए थे। इस मामले में अभी ट्रायल जारी है। एनआईए के गवाहों की फेरहिस्त लंबी है।
असीमानंद ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर करके दलील दी थी कि करीब सौ से अधिक गवाहों की गवाहियों में लंबा समय लग सकता है और इस लिहाज से उन्हें लंबे समय तक जेल में ही रखना सही नहीं होगा, लिहाजा उन्हें जमानत दी जाए।
असीमानंद ने जमानत अर्जी के साथ पंचकूला की अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने और एफआईआर रद किए जाने की मांग भी की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
असीमानंद के अलावा दो अन्य सहअभियुक्तों ने भी अर्जियां दाखिल की थीं। उनका कहना है कि एनआईए ने कुछ दस्तावेज उन्हें मुहैया नहीं कराए हैं। इन अर्जियों पर भी एनआईए से जवाब तलबी की गई है।
समझौता ब्लास्टः असीमानंद की जमानत का विरोध
एनआईए ने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में जेल में बंद स्वामी असीमानंद की जमानत अर्जी का विरोध किया है।
एनआईए ने किया विरोध
नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में जेल में बंद नभा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद की जमानत अर्जी का विरोध किया है।
एनआईए ने कहा है कि असीमानंद ही ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता था और ब्लास्ट के लिए फंडिंग भी उसी ने की थी। वह दो मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में भी गुनाह कबूल चुका है। इस गंभीरता के मद्देनजर जमानत अर्जी रद्द की जाए।
असीमानंद ने लगाई थी जमानत की गुहार
हाईकोर्ट के जस्टिस एसके मित्तल की बेंच ने एनआईए से कुछ और जानकारियां मांगते 23 जुलाई के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है। एनआईए अदालत पंचकूला की ओर से जमानत अर्जी रद्द किए के बाद असीमानंद ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर करके कहा था कि एनआईए के गवाहों की फेरहिस्त लंबी है।
असीमानंद ने दलील दी थी कि करीब एक सौ से अधिक गवाहों की गवाहियों में लंबा समय लग सकता है और उसे लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं होगा, लिहाजा जमानत दी जाए। हाईकोर्ट ने एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
उपरोक्त तथ्यों के अलावा एनआईए ने हाईकोर्ट से यह भी कहा कि इस मामले में अभी तीन अभियुक्त फरार हैं, उनकी गिरफ्तारी बाकी है। इसके अलावा एनआईए को और गहराई से जांच करनी है।
उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी 2007 को दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस में पानीपत के पास ब्लास्ट में 68 लोग मारे गए थे और 12 जख्मी हुए थे। इसमें असीमानंद को मुख्य आरोपी है।
मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपी
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले की शुक्रवार को पंचकूला की एनआईए की अदालत में सुनवाई हुई। इस मामले के मुख्य आरोपी असीमानंद सहित सभी चार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में एनआईए ने चार डॉक्टरों को गवाही के लिए बुलाया। अदालत में उनके बयान दर्ज किए गए।
डॉक्टरों ने ब्लास्ट में मारे गए यात्रियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच अगस्त की तारीख तय की है। उस तारीख पर अन्य गवाहों के बयान दर्ज होंगे।
एनआईए के वकील राजन मल्होत्रा ने बताया कि सभी चार डॉक्टरों के बयान हुए हैं, जिन्होंने ब्लास्ट में मारे गए लोगों की शिनाख्त की थी। कुछ ऐसे शव भी थे, जिनकी पहचान नहीं हो सकी थी। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सौंपी गई है।
बता दें कि 18 फरवरी 2007 को चांदनी बाग थाने के तहत दीवाना स्टेशन के नजदीक समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 66 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 13 घायल हो गए थे।
समझौता ब्लास्ट: 3 गवाहों ने दर्ज कराए बयान
समझौता ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को तीन रेल कर्मियों ने अदालत में बयान दर्ज कराए। प्वाइंटमैन बीएल मीणा ने बताया कि घटना के दिन 18 फरवरी 2007 को वह दीवाना रेलवे स्टेशन पर तैनात थे।
धमाके के बाद जब ट्रेन में आग लगी तो उन्होंने इसकी जानकारी असिस्टेंट स्टेशन मास्टर वीके गुप्ता को दी। बाद में सभी कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे।
इसी दौरान वहां कुछ बोतलें भी पड़ी थी, जिनमें तरल पदार्थ था। इसे देखकर पास मौजूद गार्ड सुरेश ने बोतल में बम होने की आशंका जताते हुए तुरंत उन्हें फेंकने को कहा।
एनआईए के काउंसिल राजन मल्होत्रा को दी गई गवाही में गेटमैन अशोक कुमार ने बताया कि वह घटना के दिन फाटक नंबर-49 पर थे और उनके सामने ही ट्रेन की बोगियां जलती हुई रुकी।
वहीं जेई फूल चंद ने बयान दिया कि घटना के अगले दिन वॉशिंग के बाद सुबह छह बजे इसे सुपुर्द कर दिया गया।
समझौता ब्लास्ट: असीमानंद सहित 4 पर आरोप तय
बहुचर्चित समझौता एक्सप्रेस मामले में आज एनआईए की विशेष अदालत में 4 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। असीमानंद सहित पांच आरोपियों की आज अदालत में पेशी थी।
दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद पर अदालत ने चारों पर हत्या,हत्या का प्रयास, रेलवे एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत आरोप तय किए। मामले की अगली सुनवाई 24-25 फरवरी को होगी।
गौरतलब है किहरियाणा के पानीपत के नजदीक समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी, 2007 को बम विस्फोट हुए थे, जिससे बोगियों में आग लग गई थी जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई और 12 यात्री घायल हो गए थे।
इस मामले की प्रारंभिक जांच सरकारी रेलवे पुलिस और हरियाणा पुलिस के विशेष जांच दल ने की थी। लेकिन गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह मामला एनआईए को दे दिया गया था।
समझौता ब्लास्ट केसः जानिए अब तक का पूरा मामला
बहुचर्चित समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट के मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान व राजेंद्र चौधरी पर पंचकूला की विशेष एनआईए अदालत में विभिन्न धाराओं में आरोप तय हो गए हैं। चारों आरोपी अंबाला जेल में बंद हैं। एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की पहले ही हत्या हो चुकी है।
सबसे पहले फरवरी 2011 को सबसे पहले स्वामी असीमानंद, फिर लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने राम कलसांगरे, संदीप ढांगी व आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी को भी आरोपी बनाया गया था। संदीप ढांगी व राम जी कलसांगरे भगोड़ा घोषित हो चुके हैं।
क्या है मामला
18 फरवरी 2007 को पानीपत में दीवाना के नजदीक समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट हुआ था। इस ब्लास्ट से दो बोगियों में आग लगी थी, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों यात्री घायल हो गए थे।
यह ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान (लाहौर) तक चलती थी। मरने वालों में ज्यादा यात्री मुस्लिम थे। पहले रेलवे पुलिस और हरियाणा पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन 26 जुलाई 2010 को जांच की जिम्मेदारी नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) को मिल गई।
आरोप लश्कर ए तैयबा, सिमी सहित कई संगठनों पर लगते रहे, लेकिन बाद मे हिंदू संगठनों का नाम आने लगा। 20 जून 2011 को एनआईए ने चार्जशीट दाखिल की थी।
इसमें आरोपियों में स्वामी असीमानंद, मृतक सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप ढांगी और रामजी कलसांगरे शामिल थे। इसके बाद 9 अगस्त 2012 को सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर की गई थी, जिसमें कमल चौहान उर्फ भाई साहब, राजेंद्र चौधरी को आरोपी बनाया गया था।
सबसे पहले गिरफ्तार हुए थे स्वामी असीमानंद
इस मामले में सबसे पहले फरवरी 2011 में स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी हुई थी। उसके बाद लोकेश शर्मा, फिर कमल चौहान और उसके बाद राजेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया गया था।
एनआईए ने उक्त के अलावा राम कलसांगरे, संदीप ढांगी व आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी को भी आरोपी बनाया गया था। जोशी की मौत हो चुकी है, जबकि संदीप ढांगी व राम जी कलसांगरे भगोड़ा घोषित हो चुके हैं।
आरोपियों की प्रोफाइल
1. स्वामी असीमानंद
असली नाम- नाभा कुमार सरकार
पेशा- गुजरात के ढांग स्थित वनवासी कल्याण आश्रम के संचालक
गिरफ्तार-19 नवंबर 2010 को सीबीआई ने हरिद्वार से मक्का मदीना ब्लास्ट के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में 24 दिसंबर 2010 को एनआईए के हवाले किया गया।
2. लोकेश शर्मा
पेशा- आरएसएस कार्यकर्ता, सुनील जोशी के बेहद करीबी।
गिरफ्तार- 17 जून 2010 को अजमेर ब्लास्ट के आरोप में गिरफ्तार। समझौता ट्रेन में भी बम प्लांट करने का आरोप।
3. कमल चौहान
पेशा- आरएसएस कार्यकर्ता
गिरफ्तार- 12 फरवरी 2012 को गिरफ्तार, ट्रेन में बम रखने का आरोप। मीडिया के सामने कबूलनामा।
4. राजेंद्र चौधरी उर्फ पहलवान
पेशा- रेसलिंग और आरएसएस कार्यकर्ता। गाजियाबाद में एक प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996 में सम्मानित किया था। समझौता ब्लास्ट के बाद मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा में नौकरी की तैयारी भी की।
गिरफ्तार- 15 दिसंबर 2012 को गिरफ्तार हुआ।
आरोप और धाराएं
आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307(हत्या का प्रयास), 324(शारीरिक चोट पहुंचाना), 326 (खतरनाक हथियारों से नुकसान पहुंचाना), 124ए (राजद्रोह), 438(ज्वलनशील पदार्थ से नष्ट करने के लिए सजा) व 440 (हत्या या नुकसान पहुंचाने की तैयारी के बाद वारदात को अंजाम देना) के अलावा रेलवे एक्ट की धारा 150 (ट्रेन को मलबा करने का प्रयास), 151 (रेलवे प्रॉपर्टी को नष्ट करना), 152 (रेल में सफर कर रहे यात्रियों की सुरक्षा में सेंध) व एक्सप्लोसिव सबस्टानसेज एक्ट 1980 की धारा 3, 4, 6 के साथ प्रीवेंशन ऑफ डैमेज ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1984 की धारा 3 (पब्लिक प्रापर्टी को नुकसान पहुंचाना), 4 (आग या अन्य ज्वलनशील वस्तु से नुकसान पहुंचाना) और अन लॉ फुल एक्टिविटी एक्ट के धारा 13, 15, 16, 17, 18, 19 और 23 के तहत आरोप तय किए गए हैं।