रोडवेज बस में छेड़छाड़ व मारपीट मामले में एक बार फिर दोनों बहनें मीडिया के सामने आईं। दोनों बहनों का कहना है कि बस में लड़कों की पिटाई तो सभी को दिखाई दे रही है, लेकिन छेड़छाड़ तो बस स्टैंड से ही शुरू हो गई थी।
वह किसी को दिखाई नहीं दे रही है। लड़कियों व उनके अधिवक्ता ने एसआईटी से जांच के साथ दोनों पक्षों और गवाहों का नार्को और लाईडिटेक्टर टेस्ट कराए जाने की मांग की है। दोनों बहनों ने राष्ट्रीय और प्रदेश महिला आयोग के अलावा आईजी रोहतक रेंज को भी पूरे मामले के बारे में एक शिकायत पत्र भेजा है।
तो हम सुसाइड कर लेतीं
थाना खुर्द निवासी दोनों बहनों आरती और पूजा ने सोमवार को यहां प्रेसवार्ता की। आरोप लगाया कि उन पर बहुत ज्यादा दबाव बनाया जा रहा है। मानसिक तौर पर लगातार परेशान किया जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि वे सुसाइड तक कर लें, लेकिन परिवार व समाज के लोगों ने सहायता की तो वे कुछ संभल पा रही हैं। आखिर दम तक न्याय के लिए लडे़गी।
बहनों ने कुछ यूं बताई सारी कहानी
दोनों बहनां ने आरोप लगाया कि मामला काफी पहले बस स्टैंड से शुरू हो गया था। बस स्टैंड पर ही कुलदीप व मोहित ने उनकी ओर पर्ची फेंकी थीं, लेकिन पर्ची नहीं उठाई तो वे उनके पीछे लग गए और अश्लील कमेंट करने लगे।
बस में बैठी तो पीछे-पीछे चढ़ गए। अचानक बस को बदल दिया गया। इसके बाद वे दूसरी बस में पहुंची तो वे लड़के भी वहां पहुंच गए और वह 15-16 नंबर सीट पर बैठ गईं। लड़कों ने सीट को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया। दोनों का कहा है कि जिस महिला की सीट को लेकर विवाद की बात कही जा रही है, उस महिला को तो कंडक्टर ने दूसरी सीट पर पहले ही बैठा दिया था।
बस चली तो वे जानबूझ कर शरीर से टच करने का प्रयास करते रहे और कंधे तक पर हाथ रख दिया था। लड़कों का पूरा ग्रुप बन गया और सभी हूटिंग कर रहे थे। पाकस्मा मोड़ पर उन्होंने अपने तीसरे साथी दीपक को भी बुला लिया। आरती ने उनका विरोध किया तो उन्होंने आरती को धक्का देकर स्टेपनी पर गिरा दिया था। इस पर उसने बैग में से बैल्ट निकाली और उन्हें मारा था।
नहीं निकाला गया था खरखौदा कॉलेज से
पूजा ने कहा कि वे अपना पक्ष रखने के लिए मीडिया के सामने आए हैं। समाज में उनकी छवि बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुख्ता सुबूत हों तभी आरोप लगाए जाएं। उन्हें कभी खरखौदा के कन्या महाविद्यालय से नहीं निकाला गया, बल्कि उन्होंने स्वयं माइग्रेशन कराया था। इसका बड़ा कारण ये था कि खरखौदा कॉलेज में दोनों बहनों की फीस 40 हजार रुपये के आसपास पड़ती थी, जबकि आईसी कॉलेज में फीस महज 7-7 हजार रुपये है।
307 के तहत भी दर्ज हो केस
दोनों बहनों के एडवोकेट अतर सिंह पंवार ने कहा कि सेशन जज या एडिशनल सेशन जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित हो। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत भी केस दर्ज किया जाए क्योंकि दोनों बहनों को चलती बस से फेंका गया था।
पक्ष में आईं खरखौदा कॉलेज की टीचर
दोनों बहनों के बचाव में सोमवार को उनकी एक पूर्व अध्यापिका आईं। दिल्ली के छावला इलाके से पहुंची अध्यापिका पिंकी शौकीन ने बताया कि वह खुद थाना कलां गांव की निवासी है। वह कन्या महाविद्यालय खरखौदा में उन्हें पढ़ाती थी और उनके साथ सुबह व शाम को ऑटो में भी आती जाती थी। दोनों लड़कियों के चरित्र पर उंगली उठाना गलत है।
वर्जन
‘सोमवार को मामले से जुड़े कुछ गवाहों को बुलाया गया था। उनके बयान रिकॉर्ड किए गए हैं। मामले में जांच चल रही है, इस स्तर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।’
यशपाल खटाना, डीएसपी, रोहतक।