42 लाख की जाली करेंसी छापने वाले अभिनव वर्मा व उसकी बहन बिशाखा को मंगलवार को जिला अदालत से जमानत पर मिल गई। दोनों ने अदालत में एक-एक लाख के बान्ड भरे हैं। इसके बाद उन्हें राहत मिली है।
वहीं, सूत्रों की माने तो सोहाना थाना पुलिस को कोर्ट में आरोपियों का चालान 60 दिनों में पेश करना था, लेकिन पुलिस पेश नहीं कर पाई। इसका फायदा उठाकर आरोपियों के वकील ने अदालत में जमानत अर्जी दायर की थी। हालांकि पुलिस ने चालान न पेश होने की बात को नकार दिया है।
जिक्रयोग है कि बचाव पक्ष के वकील पहले दिन से ही पुलिस की कहानी को झूठा बता रहे थे। उन्होंने दलील थी कि पुलिस ने आरोपियों को जीरकपुर से गिरफ्तार किया था। जबकि उनकी लोकेशन बाकरपुर में दिखाई गई थी।
इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में एक अर्जी लगाई थी। साथ ही जीरकपुर के एक होटल से सीसीटीवी की फुटेज लेकर सुरक्षित रखने का फैसला किया था।
नोटबंदी के दौरान 2000 नए नोट पकड़कर मोहाली पुलिस ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। साथ ही दावा किया गया था कि पकड़े गए आरोपियों के लिंक पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से हो सकते हैं।
डिजिटल प्रिंटर से तैयार किए थे 2000 रुपये के जाली नोट
जानकारी के मुताबिक, अभिनव ने एक नामी संस्थान से इंजीनियरिंग की है। उसकी एक कंपनी भी है, जो दिव्यांगों के लिए ब्रेल यंत्र तैयार करती है। वह प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित हो चुका है।
जबकि बिशाखा उसकी कंपनी में एचआर विभाग में है। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी ने अपनी कंपनी में डिजिटल प्रिंटर से 2000 का नोट स्कैन कर जाली करेंसी छापे थे। वह तीस फीसदी कमीशन काटकर लोगों को पुराने नोटों के बदले नए नोट देते थे।
मैसूर से कागज लाने की कहानी हो गई थी फेल
इससे पहले पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों ने मैसूर की सरकारी कागज मिल से नोट छापने के लिए पेपर हासिल किया था, लेकिन जब जांच हुई तो यह बात भी फर्जी निकली थी।