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दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे बच्चियों से दुराचार के मामले, पोर्न है वजह!

Mon, 25 Dec 2017 01:17 AM IST
शनि शर्मा/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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- फोटो : Demo Pics
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बच्चियों से दुराचार के मामले में हर साल दो गुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। हरियाणा के रोहतक के पिछले तीन साल के आंकड़े गवाह हैं कि बच्चियों की सुरक्षा के मोर्चे पर पुलिस बुरी तरह फेल साबित हुई है।
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वर्ष 2015 में पोक्सो एक्ट के तहत कुल 10 मामले आए थे। जो वर्ष 2016 में दोगुने से ज्यादा बढ़कर 23 हो गये। इस साल नवंबर तक पोक्सो एक्ट के तहत 36 मामले दर्ज हो चुके है। बच्चियां कभी बाहरी लोगों के यौन शोषण का शिकार हो रही हैं तो कभी उसके अपने ही उसे हैवानियत का शिकार बना रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है, जिससे बच्चियों के खिलाफ होने वाले दुराचार के मामलों को कम किया जा सके। 

बच्चियों के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस पोक्सो एक्ट में केस दर्ज करती है। पिछले तीन वर्ष में जिले के विभिन्न थानों में पोक्सो एक्ट के 69 केस दर्ज किये गये। इन मामलों में पुलिस ने करीब 63 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा। मगर प्रत्येक साल मामले बढ़ते गये। करीब 16 एफआईआर कैंसिल भी की गईं। 
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5 में से 2 केस में करीबियों ने बनाया शिकार 
जांच पड़ताल में सामने आया कि पोक्सो एक्ट में दर्ज किये जाने वाले प्रत्येक पांच मामलों में से दो केस में करीबियों ने ही बच्चियों का यौन शोषण किया। वर्ष 2016 और 2017 में दो पिताओं पर ही बेटी के साथ दुराचार करने का केस महिला थाने में दर्ज किया गया। जबकि अन्य मामलों में बाहरी लोगों मासूम को बहला फुसलाकर शिकार बनाया गया। पीजीआईएमएस के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ राजीव गुप्ता का कहना है कि बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित आने वाले अधिकतर मामलों में पीड़ित के परिचित ही आरोपी होते है। इनमें चालक, शिक्षक सहित परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। 
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बच्चियां इसलिए बन रही सॉफ्ट टारगेट 

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बच्चियां इसलिए बन रही सॉफ्ट टारगेट 
- देश में सेक्स एजूकेशन का अभाव। 
- उम्र कम होने के कारण बच्चियों को पता नहीं होता बेड और गुड टच का अंतर
- अभिभावकों और बच्चियों में संचार का अभाव। 
- बदनामी के डर से अकसर बच्ची की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेते अभिभावक
- स्कूलों में यौन उत्पीड़न के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम का न होना

दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले में बढ़े 
बच्चियों के उत्पीड़न के मामले में तो पुलिस विभाग की किरकिरी हो ही रही है। महिला अपराध से जुड़े दुष्कर्म और छेड़छाड़ के  स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे मामले भी वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में बढ़े है। हालांकि इन दो साल में दुष्कर्म के 37 और छेड़छाड़ के 60 केस जांच में झूठे पाए गये है। दो साल में 200 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

दुष्कर्म के केस (आंकड़ों में)
वर्ष                  केस   अनट्रेस   कैंसिल  
2016               60                 0     18 
2017 नवंबर तक   83               0       19

छेड़छाड़ के केस (आंकड़ों में)
वर्ष               केस   अनट्रेस   कैंसिल  
2016             125               2         50
2017             210              0          10
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rape victim
इस तरह के मामलों में कमी लाने के लिए बच्चों को सेक्स एजूकेशन देना जरूरी है। ताकि ऐसी किसी घटना के बारे में वह जानता हो और तुरंत अपने अभिभावकों को बता सके। ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी का एक कारण पोर्न मूवी भी है। लोगों को आसानी से इंटरनेट पर पोर्न मूवी मिल जाती है। इससे उनकी मानसिकता में परिवर्तन आता है। अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ लगातार बातचीत करनी चाहिए। ताकि वह खुलकर अपनी बात रख सके।  
डॉ. राजीव गुप्ता, विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग पीजीआईएमएस 

ऐसे मामलों में कमी लाने के लिए जिला पुलिस की तरफ से स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किये जा रहे हैं। इस संबंध में डीजीपी ने आदेश जारी किये थे। साथ ही स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक करके मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। ऐसी घटनाओं में जागरूकता अभियान चलाने निश्चित तौर पर कमी आएगी। पुलिस वारदात में शामिल आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करती है। 
- नारायणचंद, डीएसपी रोहतक
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