नाबालिग के अपहरण और दुराचार के एक मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पीड़िता के बयानों में मतभेद और आरोप साबित न होता देख तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। बरी होने वालों में मुख्य आरोपी धनास, न्यू कॉलोनी निवासी अमरजीत उर्फ तोता के अलावा वहीं के लवकेश और अनिल थे। तीनों के खिलाफ सेक्टर-34 थाना पुलिस ने 16 अक्तूबर 2013 को अपहरण, धमकाने व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया था।
केस के ट्रायल के बाद दुराचार की धारा जोड़ी गई थी। बचाव पक्ष के अनुसार पुलिस केस में कई कमियां थीं। इन्हें कोर्ट में उजागर करने के बाद तीनों आरोपी बरी हुए। मामला 15 अक्तूबर 2013 का है। शहर निवासी एक 10वीं पास नाबालिग घर से किसी काम से बाहर गई थी।
वापसी के दौरान अमरजीत उसे मिला। आरोप के अनुसार उसने उसे धमकाया कि अगर वह उसके कमरे में नहीं गई तो वह उसे और उसके परिवार को जान से मार देगा। नाबालिग के अनुसार अमरजीत के पास चाकू भी था। इस पर आरोपी उसे अपने कमरे में ले गया और कुंडी लगा ली। लड़की के शोर मचाने पर आरोपी ने टीवी की आवाज तेज कर दी और उससे दुराचार किया।
जब वहां पीड़िता का भाई पहुंचा तो आरोपी ने उसकी पिटाई कर दी। नाबालिग के बयानों के अनुसार आरोपी उसके भाई को कमरे में बंद कर उसे कार से ले गया। कार को उसका दोस्त अनिल चला रहा था। वहीं लवकेश (अमरजीत का भाई) कार की पिछली सीट पर बैठा था। पीड़िता के अनुसार तीनों ने उसे 15 दिन तक कैद में रखने के बाद एक पार्क में छोड़ दिया था। वहां पुलिस आई और उसे उसके घर पर छोड़ा। पीड़िता सेक्टर-44 की एक कोठी में काम करती थी।
बचाव पक्ष के अनुसार पीड़िता के मिलने के बाद उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में कहा था कि वह अपनी मर्जी से अमरजीत के घर गई थी। वहां उसके भाई के आने पर वह वहां से भाग गई और मोहाली फेज-2 के एक पार्क में चली गई। वहां एक महिला मिली और उसे काम दिलवाने की बात कही।
महिला के पति ने उसे घर में नहीं रहने दिया तो उस रात वह पार्क में रही। इसके बाद एक और महिला मिली, जिसने उसे काम दिलवाया। रोज काम के बाद वह अमरजीत के पास चली जाती थी। पुलिस ने उसे उसके फोन से ट्रेस किया था। नाबालिग ने उस समय कहा था कि उसके साथ किसी ने कोई गलत काम नहीं किया और वह अपनी मर्जी से घर से गई थी।