बठिंडा पुलिस की करतूत तब उजागर हो गई, जब ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने थाने में छापा मारा। महिला अवैध हिरासत में थी। हालांकि पुलिस ने मामले में जो सफाई दी, वह भी सवालों के घेरे में है।
दरअसल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनदीप कौर ने जिले के थाना नेहियांवाला पुलिस की ओर से अवैध तौर पर हिरासत में रखी गई महिला गुरप्रीत कौर को थाने में छापामरी कर बरामद किया। इसके बाद जज के आदेश पर महिला को मेडिकल के लिए सिविल अस्पताल बठिंडा ले जाया गया। इस संबंध में एसएसपी बठिंडा स्वप्न शर्मा ने बताया कि महिला को 307 के केस में गिरफ्तार किया गया था।
यह है मामला
21 मार्च को गांव जंडवाला के अकाली महिला सरपंच के पति अमरजीत सिंह पर गांव के ही मनदीप सिंह, गुरजीत सिंह और पम्मा सिंह ने गोली चला दी थी। इसमें अमरजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में थाना नेहियांवाला पुलिस ने घायल की शिकायत पर मनदीप सिंह, गुरजीत सिंह, पम्मा सिंह और जगलीन सिंह के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था जबकि इस मामले में जगलीन सिंह फरार था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसके घर में वीरवार को छापामरी करने पहुंची और वह तो मिला नही पुलिस ने घर में मौजूद महिला गुरप्रीत कौर को ही हिरासत में लेकर थाने में बंद कर दिया।
इसके बाद पीडित परिवार ने अपने वकील के जरिए अदालत में पहुंच कर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास इंसाफ के लिए गृहार लगाई । पीड़ित पक्ष के वकील की दलीलों से सहमत होकर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनदीप कौर खुद देर शाम थाने में छापामारी की। इस दौरान वहां अवैध तौर पर हिरासत में रखी गई महिला को बरामद किया गया। महिला के मेडिकल के लिए सिविल अस्पताल लेजाया गया।
एसएसपी स्वप्न शर्मा ने कहा कि महिला 307 के केस में नामजद थी जिस को पुलिस ने गिरफतार किया गया था। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उसको अवैध तौर पर हिरासत में नही रखा गया।
पुलिस की कारवाई शक के घेरे में
जांच के दौरान बताया गया कि इस मामले में उस समय पुलिस ने महिला को नामजद नही किया था और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनदीप कौर की छापामरी के बाद तुरंत पुलिस ने बुधवार को संबंधित महिला को इस मामले में नामजद कर लिया। इसके चलते पुलिस की कारवाई शक के घेरे में आ गई है।