पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने रविवार को मोस्ट वांटेड आतंकवादी और बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) मॉड्यूल के सक्रिय गुर्गे चरनजीत सिंह उर्फ पटियालवी को गिरफ्तार किया है। वह 12 साल से अलग-अलग पहचान और ठिकाने बदल गिरफ्तारी से बच रहा था। पंजाब सरकार ने हाल ही में गैंगस्टरों के विरुद्ध कार्रवाई तेज करने का आदेश दिया था। वहीं एडीजीपी प्रमोद बान के नेतृत्व में एजीटीएफ का गठन किया।
एजीटीएफ के डीआईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पटियाला के गांव बूटा सिंह वाला निवासी चरनजीत पटियालवी को थाना माछीवाड़ा में विस्फोटक अधिनियम की धारा और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) के तहत दर्ज मुकदमे में भगोड़ा करार दिया गया था। हालांकि पटियालवी के एक अन्य साथी आतंकवादी गुरमेल सिंह बोबा निवासी बूटा सिंह वाला को इस मामले में डेटोनेटर और आरडीएक्स की बरामदगी समेत गिरफ्तार किया गया था।
भुल्लर ने बताया कि एक सूचना के बाद एआईजी एजीटीएफ गुरमीत सिंह चौहान और डीएसपी एजीटीएफ बिक्रमजीत सिंह बराड़ के नेतृत्व में एजीटीएफ की टीमों ने पटियालवी को डेराबस्सी के गांव लाली के गुरुद्वारा साहिब के नजदीक से गिरफ्तार किया। पटियालवी ग्रंथी का भेष धारण कर इस समय पश्चिमी बंगाल के खड़गपुर स्थित गुरुद्वारा साहिब में रह रहा था और किसी भी संचार साधन का इस्तेमाल नहीं कर रहा था। उसके पास से पश्चिमी बंगाल के पते वाले अलग-अलग पहचान पत्र मिले हैं।
हो सकते हैं अहम खुलासे
भुल्लर ने बताया कि जांच प्रक्रिया जारी है। इसके साथ अन्य गिरफ्तारियां और अहम खुलासे होने की आशा है। अभी तक पूछताछ में कुछ ऐसे खुलासे हुए हैं जिससे जांच अभी जारी रखी जाएगी। जल्द ही पंजाब पुलिस इसको लेकर अहम खुलासे करेगी।
2010 में हुआ था पर्दाफाश
चरनजीत उर्फ पटियालवी बीकेआई आतंकवादी मॉड्यूल का सक्रिय सदस्य था। यह मॉड्यूल 2007 में लुधियाना के शिंगार सिनेमा बम धमाकों और 2010 में काली माता मंदिर, पटियाला और अंबाला में हुए बम धमाकों की साजिश में शामिल था। पंजाब पुलिस ने 2010 में पटियालवी के बाकी सभी साथियों को गिरफ्तार कर लिया था।