प्रमोशन न मिलने से और प्रताड़ना से तंग होकर पावरकॉम के डिप्टी चीफ इंजीनियर ने सल्फास खाकर सुसाइड कर ली। पावरकॉम अधिकारी बलबीर को किस कदर प्रताड़ित कर रहे थे, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हाईकोर्ट के बलबीर को प्रमोशन देने संबंधी आदेशों की परवाह नहीं की।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजकुमार वेरका ने मामले का संज्ञान लेते हुए रविवार को अधिकारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वेरका ने अस्पताल जाकर बलबीर की पत्नी कमला देवी के बयान रिकॉर्ड किए।
डॉ. वेरका के सामने एसीपी नार्थ हरजीत सिंह और तहसीलदार संजीव कुमार शर्मा पेश हुए। वेरका ने बताया कि कमला देवी के बयान से सामने आया है कि बॉर्डर जोन कार्यालय में डिप्टी चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत बलबीर की कई साल से पदोन्नति रुकी हुई थी। अफसरों ने उनकी एसीआर खराब की थी।
बलबीर सिंह ने इसकी अपील हाईकोर्ट में भी की थी। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि बलबीर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बंद करके उनको पदोन्नति दी जाए, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने जानबूझ कर कार्रवाई बंद नहीं की और उन्हें प्रताड़ित करते रहे। इसी से परेशान होकर बलबीर ने सल्फास निगल कर आत्महत्या कर ली।
सीएम बादल से मामले की जांच की मांग
बलबीर सिंह की पत्नी कमला देवी ने कहा कि वह बलबीर को परेशान करने वाले पावरकॉम अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को पत्र लिखेंगी।
मामला दलित उत्पीड़न का भी है। इसलिए एट्रोसिटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने के अलावा आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले पावरकॉम अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश पुलिस को दिया गया है।
-डॉ.राजकुमार वेरका, उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग