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सुच्चा सिंह मर्डर केस: प्रेमी-प्रेमिका को उम्रकैद

Thu, 05 Dec 2013 09:55 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह की हत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस के बर्खास्त कांस्टेबल बसंत और उसकी प्रेमिका सरिता को जिला एवं सत्र अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके अग्रवाल की अदालत ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर पांच माह में 12 सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है। अदालत ने बसंत पर 32 हजार रुपये और सरिता पर 29 हजार रुपये जुर्माना भी किया।

इससे पहले अभियोजन पक्ष ने बसंत को फंासी की सजा देने की मांग की थी। दलील थी किबसंत साधारण अपराधी नहीं है। इंस्पेक्टर की हत्या से पहले उसने सोनीपत में दो महिला समेत तीन लोगों की हत्या की है।
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बसंत समाज के लिए खतरा है इसलिए उसे उम्रकैद की जगह फांसी दी जाए। बचाव पक्ष के वकील ने फांसी की सजा देने का विरोध किया।

अदालत ने सजा सुनाने से पहले बसंत से अपना पक्ष रखने के लिए कहा। बसंत ने अदालत में कहा कि उसने कोई हत्या नहीं की है। चंडीगढ़ पुलिस ने हत्या के मामले में फंसाया है। वहीं सरिता ने कहा कि उसने कोई हत्या नहीं की है।

अलग-अलग सजाएं
हत्या के लिए - बसंत और सरिता को आजीवन कारावास और बीस हजार रुपये जुर्माना।
घायल कर लूट के लिए - बसंत और सरिता को सात साल कैद व सात हजार रुपये जुर्माना।
डयूटी में बाधा पहुंचाना-बसंत और सरिता को दो साल कैद व दो हजार रुपये जुर्माना।
आर्म्स एक्ट में - तीन साल कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना।

जेल ट्रांसफर की डाली अर्जी
सजा सुनाने के बाद बसंत ने अपनी जेल ट्रांसफर की अर्जी जिला अदालत में दायर की । अर्जी में कहा कि उसके खिलाफ सोनीपत में केस चल रहा है। उसके मां और बाप काफी बुजर्ग हैं। जेल में मिलने के लिए वे चंडीगढ़ नहीं आ सकते। बुडै़ल जेल में उसकी जान को भी खतरा है। मुझे मारने की योजना बनाई जा रही है।

25 गवाह
अदालत ने इस मामले में 25 गवाहों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। बसंत और सरिता को सजा में चश्मदीद होमगार्ड जवान जतिंद्र, जिला अदालत में संतरी अनिल कुमार के बयान और दोषियों के कपड़ों से मिले खून के निशान अहम सुबूत रहे।

यह था मामला
ट्रैफिक में तैनात इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह गत 7 जून की रात ड्राइवर होमगार्ड जवान जतिंद्र के साथ नाइट चेकिंग पर थे। सेक्टर-17 जिला अदालत के गेट के पास (बस स्टैंड की तरफ) एक युवक और युवती खड़े थे। इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह जिप्सी से उतरे और दोनों से पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दोनों को इंटरसेप्टर जिप्सी में पीछे बैठाकर सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन ले जाने लगे। यह युवक चंडीगढ़ पुलिस से बर्खास्त कांस्टेबल सोनीपत के गांव गौरा का निवासी बसंत उर्फ बंटी था।

जिप्सी स्टार्ट करते ही बंटी ने इंस्पेक्टर पर चाकुओं से सीने पर दाईं तरफ छह वार किए। ड्राइवर बचाव को आगे बढ़ा तो उसके हाथ पर भी वार किए गए। इसके बाद दोनों को बाहर फेंककर बसंत जिप्सी लेकर फरार हो गया। होमगार्ड जवान ने मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। पुलिस ने इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह और होमगार्ड जवान को पीजीआई दाखिल करवाया। यहां डाक्टरों ने सुच्चा सिंह को मृत घोषित कर दिया। बसंत और सरिता को 9 जून 2013 को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बंसत की निशानदेही पर स्विफ्ट कार और एसएलआर भी बरामद की थी।

18 अप्रैल को किया था डबल मर्डर
बर्खास्त कांस्टेबल बसंत की प्रेमिका सरिता की शादी 15 अप्रैल 2013 को सोनीपत निवासी संदीप कुमार से हुई थी। शादी के बाद 18 अप्रैल को बसंत स्विफ्ट कार लेकर अपनी प्रेमिका के ससुराल गया और सरकारी एसएलआर से संदीप और उसकी मां रोशनी की हत्या कर सरिता के साथ फरार हो गया था। बसंत को 20 अप्रैल को बर्खास्त किया गया था। सेक्टर 26 थाना पुलिस ने बसंत केखिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

कोट
दोषी बसंत उर्फ बंटी अनुशासन के लिए जानी जाती फोर्स का कर्मचारी था। लेकिन उसने ऐसा करन केवल खुद की जिंदगी खराब की बल्कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भी जिंदगी छीन ली।  ऐसी फोर्स में जवानों की डयूटी लोगों की सेवा के लिए और उनकी जिंदगी की सुरक्षा के लिए होती है।अगर यही लोग कानून को अपने हाथो में ले लेंगे, किसी बेगुनाह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की हत्या कर देगें तो इससे पुलिस की प्रति लोगाें में क्या धारणा बनेगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मामले में बसंत की उम्र और पहले की परिस्थिति को देखते हुए यह रेयर टू रेयर केस नहीं है।
- अदालत

टाइम लाइन
07  जून 2013- जिला अदालत के बाहर इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह की चाकुओं से गोदकर हत्या
09 जून 2013 - सोनीपत पुलिस ने बसंत और सरिता को दोहरे हत्याकांड में दिल्ली से गिरफ्तार किया था
09 जून 2013-हत्या मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने दोनों का प्रोडक्शन वारंट मांगा
13 जून 2013-चंडीगढ़ पुलिस ने दोनों का प्रोडक्शन वारंट हासिल कर उन्हें गिरफ्तार किया
24 अगस्त 2013-सेक्टर 17 थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दायर की
17 सितंबर 2013-अदालत ने उन पर हत्या, सरकारी कर्मी की ड्यूटी में बाधा डालने, घायल करने, लूट करने और आर्म्स एक्ट की धाराआें के तहत आरोप तय किए
03 दिसम्बर2013 अदालत ने बसंत और सरिता को हत्या, सरकारी कर्मी की ड्यूटी में बाधा डालने, घायल करने, लूट करने और आर्म्स एक्ट की धाराआें के तहत दोषी करार दिया।
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कोट
अदालत केफैसले से हम बहुत खुश है। बंसत और सरिता को आजीवान कारावास मिलने से इंसाफ मिला है।
- परमिंदर सिंह, शहीद इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह का बेटा

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