देशद्रोह मामले में फंसे रामपाल व उनके अनुयायियों को दोषी साबित करने में पुलिस का खजाना खाली हो जाएगा। पहले 19 करोड़ रुपये रामपाल को पकड़ने में खर्च किए गए थे। अब रामपाल के केस में 51 सौ पेज का चालान 939 अभियुक्तों को देने में भी पुलिस के लाखों रुपये खर्च हो जाएंगे।
पहले से ही स्टेशनरी की कमी से जूझ रहे विभाग के लिए हर अभियुक्त को चालान की कॉपी देना भी बड़ी मुसीबत बनेगा। नियमानुसार किसी भी मामले में जितने अभियुक्तों के खिलाफ केस दर्ज होता है, उन सभी को चालान की कॉपी पुलिस को फ्री ऑफ कॉस्ट देनी होती है। इसमें पूरा मामला होता है और फर्द इंसाफ जांच की गई रिपोर्ट सहित कई तरह के अहम दस्तावेज होते हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर इस मामले में जितने कम एडवोकेट केस लड़ेंगे अथवा एक साथ केस की एक वकील की पैरवी करने की दशा में पुलिस को कम खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि नियम के हिसाब से यह गलत है मगर यह पुलिस व अभियुक्तों के बीच आपसी सहमति होगी।
एडवोकेट विक्रम मित्तल ने बताया है कि नियम के हिसाब से इस मामले में भी 939 लोगों को भी इनती ही कॉपी उपलब्ध करवानी होगी। अब इस मामले में पुलिस कैसे एडजेस्ट करती है, यह विभाग पर निर्भर करेगा।