आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल हेडक्वार्टर का बता दो फर्जी नंबर इंटरनेट पर दे रखे थे। इन नंबरों पर विदेश में बैठे लोग अपनी दिक्कतों के लिए फोन करते थे। आरोपी ग्राहकों से फोन पर सारी जानकारी हासिल करते है और उनका पूरा सिस्टम ही हैक कर लेते। इसके बाद ग्राहकों को एक गिफ्ट कार्ड दिया जाता है और गिफ्ट कार्ड पर दिए नंबर के जरिए ग्राहकों के खातों की जानकारी हैक कर लेते है और उसके बाद सारा अकाउंट ही खाली कर देते थे।
ऐसे करते थे लोगों से धोखाधड़ी
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक आरोपी अमेरिका में रहने वाले लोगों को माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल हेडक्वार्टर से कस्टमर सपोर्ट सुविधा देने का दावा करते थे। अगर कोई ग्राहक आरोपियों के नंबरों पर फोन करता तो पहले कॉल दिल्ली जाती और बाद में लुधियाना ट्रांसफर की जाती। आरोपी खुद को कंपनी का मुलाजिम बता ग्राहकों को डराते थे कि उनका कंप्यूटर हैक हो रहा है और उनसे पूरी जानकारी ले लेते थे।
आरोपी ग्राहकों को लालच देते थे कि वह उनकी कॉल अपने सीनियर अधिकारियों को ट्रांसफर कर रहे है, जो उन्हें उनके खातों को सेफ कैसे करना है बताएंगे। आरोपी उन्हें एक फार्म भेजते और बाद में सारी जानकारी देने के साथ-साथ कह देते थे कि बैंक मुलाजिम भी हैकर्स के साथ मिला है ताकि ग्राहकों पर विश्वास बनाया जा सके।
आरोपी ग्राहकों को बैंक से पैसे निकलवाने के लिए कहते और डरा देते थे कि पैसे निकलवा ले या फिर गिफ्ट ले ले। ग्राहक डरकर गिफ्ट लेता था। इसके बाद उनके खाते की बची जानकारी लेकर पूरा खाता खाली कर देते थे।
गिरोह का किंगपिन अभी फरार
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड चैरी और पॉल नाम का युवक है। दोनों विभिन्न राज्यों के गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले युवाओं को जल्द पैसे कमाने का लालच देते और उन्हें कॉल सेंटर पर काम करने को कहते थे। अलेक्स नाम का व्यक्ति इन लोगों को सैलरी देता था। पुलिस ने तीनों को भी मामले में नामजद कर लिया है। इसके अलावा पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 30 साल से कम है। सभी 12वीं तक ही पढ़े हैं।