दलित महिला के चेहरे पर कालिख पोतकर निर्वस्त्र घुमाने के दोषियों को हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। मामला पंजाब के पंजाब के फाजिल्का का है। यहां के एक गांव में दलित महिला के बाल काटने के बाद चेहरे पर कालिख पोतकर निर्वस्त्र गांव में घुमाने की घटना के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा निलंबित किए जाने की अपील को खारिज कर दिया है।
दोषियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जिला अदालत ने उन्हें पहले एक वर्ष सजा सुनाई थी। उसके बाद पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा को बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया गया।
दोषियों ने अपनी याचिका में कहा कि वे पिछले सात महीनों से जेल में हैं, लिहाजा उनकी सजा निलंबित की जाए। जस्टिस राजन गुप्ता ने सुनवाई के दौरान दोषियों की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने महिला की सार्वजनिक तौर पर पवित्रता भंग करने की कोशिश की है। यह एक संगीन अपराध है, लिहाजा सजा निलंबित करना गलत होगा।
साल 2006 में फाजिल्का के एक गांव में दलित युवक के ऊंची जाति की लड़की से प्रेम संबंध से गुस्साए लड़की के परिवार से जुड़े 12-13 लोगों ने दलित युवक के पिता को बुरी तरह पीटा और युवक की मां के बाल काटकर मुंह पर कालिख पोत दी थी। फिर उसे निर्वस्त्र कर पुरे गांव में घुमाया था।