नगर निगम चंडीगढ़ के कर्मचारी ने फंदा लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की जेब से मिले सुसाइड नोट में दो अफसरों को जान देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। सेक्टर-19बी स्थित मकान में नगर निगम के बेलदार जसपाल सिंह (49) ने लोहे की ग्रिल से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में मृतक की शर्ट की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें लिखा है कि ‘तिलकराज ज्वाइंट कमिश्नर, वेद प्रकाश हमको बड़ा तंग करते हैं और सबसे ज्यादा परेशान करते हैं।’ पुलिस बेलदार जसपाल को जीएमएसएच-16 ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक जसपाल मूलरूप से उत्तराखंड स्थित कुमाऊं के बागेश्वर का रहने वाला था। पुलिस ने सीआरपीसी 174 के तहत मामले की छानबीन शुरू कर दी है। वहीं, सुसाइड नोट में जिन दोनों अधिकारियों का नाम लिखा है, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
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दो साल से परिवार के साथ सरकारी मकान में रह रहा था
घटना सोमवार सुबह करीब सवा सात बजे की है। चंडीगढ़ कुमाऊं सभा के प्रधान बच्चन सिंह ने बताया कि जसपाल सेक्टर-19 स्थित सरकारी मकान नंबर 1163 में पिछले दो साल से परिवार के साथ रहते थे। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। पत्नी गांव गई हुईं हैं। जसपाल नगर निगम की इंफोर्समेंट विंग में बेलदार के रूप में कार्यरत थे।
सोमवार सुबह बेटे ने देखा कि उन्होंने लोहे के ग्रिल से फंदा लगाया हुआ है। पिता को ऐसी हालत में देखकर बेटा बदहवास हो गया। उसने तुरंत बहनों को बुलाया और आसपास के लोगों को इसकी खबर दी। बच्चों ने ही पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाया।
जसपाल की शर्ट की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें तिलकराज ज्वाइंट कमिश्नर व वेद प्रकाश पर परेशान का आरोप लगाया गया है। नोट पर अलग अलग तरीके से हस्ताक्षर और 16 मार्च की तारीख भी लिखी हुई है। वहीं घटना के बाद परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।
रात नौ बजे तक वापस लौटते थे घर
मृतक के पड़ोसी पवन कुमार ने बताया कि जसपाल को देखकर लगता नहीं था कि वह नाखुश हैं। वह घर से ड्यूटी पर सुबह 8 बजे के करीब जाते थे और रात 9 बजे के आसपास लौटते थे। कुमाऊं सभा के प्रधान बच्चन सिंह और परिजनों की मांग है कि जसपाल को मानसिक रूप से परेशान करने वाले अफसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि इंसाफ मिल सके। अगर ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती तो कहीं न कहीं पुलिस पर भी सवालिया निशान खड़े होंगे।
13 मार्च से छुट्टी पर थे
पुलिस का कहना है कि जांच के मुताबिक, मृतक जसपाल 13 मार्च से अपने काम पर नहीं जा रहा था, जबकि घरवालों ने बताया कि वह रोजना ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलते थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि इसके बारे में परिजनों को क्यों नहीं पता लगा। मामले की जांच सभी पहलुओं पर की जा रही है। साथ ही नोट में लिखे हेड राइटिंग की भी जांच की जाएगी।
मेरे खिलाफ साजिश रची गई है। सुसाइड नोट पर में जो लिखा गया है, उससे मुझे कोई मतलब नहीं है। साइन और लिखावट अलग-अलग हैं। - तिलकराज, एडिशनल कमिश्नर, चंडीगढ़
जसपाल को जानता जरूर हूं, लेकिन मेरी उससे कभी बात भी नहीं हुई है और न ही कभी उनके साथ ड्यूटी लगी। इतना ही नहीं कभी उनके मोबाइल पर बात तक नहीं हुई है। मेरे नाम से कई लोग हैं, इसमें मेरा कोई रोल नहीं है। - वेद प्रकाश, सब इंस्पेक्टर इंफोर्समेंट विंग, चंडीगढ़
किसी कर्मी द्वारा इस तरह से आत्महत्या करना और निगम अधिकारियों पर तंग करने का आरोप लगाना बेहद संजीदा मामला है। इस केस को लेकर बेहद गहनता से जांच के आदेश दिए जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - राजेश कालिया, मेयर, नगर निगम
निगम कर्मी का इस तरह से जान देना और सुसाइड नोट में निगम अधिकारियों पर उसे तंग करने जैसे संगीन आरोप लगाने के इस मामले में उच्चस्तरीय जांच हो। कांग्रेस पार्टी की तरफ से की जा रही जांच के आधार पर इस केस में जिसकी भी भूमिका सामने आए उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
- प्रदीप छाबड़ा, अध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी चंडीगढ़।