एसटीएफ ने स्पेशल नाके पर आरोपी व उसके दो साथियों को कार समेत दबोचा
- फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ ने आइस ड्रग सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसे हरियाणा पुलिस में तैनात एक सब इंस्पेक्टर चला रहा था। एसटीएफ ने एसआई (सब इंस्पेक्टर) समेत तीन आरोपियों को एक किलो आइस ड्रग और आई-20 कार समेत नाके पर दबोचा है।
आरोपियों की पहचान सोनीपत के एक थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर पवन कुमार, निवासी सियाना थाना कनीना जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा), अजय कुमार, निवासी सियाना थाना कनीना, जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा) और करमजीत सिंह, निवासी नानसू, थाना सदर पटियाला के रूप में हुई है। एसटीएफ द्वारा आरोपियों से बरामद आइस ड्रग की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में छह करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि इसकी गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी गुणवत्ता का पता चल पाएगा। आरोपियों को कोर्ट ने 22 जनवरी तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है।
ऐसे पकड़ में आए आरोपी
एसटीएफ की ओर से राधा स्वामी चौक पर नाकाबंदी की गई थी। इस बीच उन्हें सूचना मिली कि आइस ड्रग की सप्लाई करने आरोपी टेंपररी नंबर वाली आई-20 कार में हरियाणा से आ रहे हैं। इसके बाद एसटीएफ ने पटियाला-डकाला रोड पर नाका लगा दिया। आरोपी की कार जब नाके पर पहुंची तो एसटीएफ ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान आरोपियों से पूछताछ और कार की चेकिंग की गई। आरोपियों की कार की सीट के नीचे से एक किलो आइस ड्रग बरामद हुई।
एसटीएफ ने पहली बार पकड़ी आइस ड्रग
राज्य में नशा तस्करों पर नकेल कसने के लिए एसटीएफ का गठन किया गया है। यह पहला मौका है जब एसटीएफ ने आइस नामक यह ड्रग पकड़ने में सफलता हासिल की। इस सफलता से एसटीएफ की पूरी टीम काफी उत्साहित है। एसटीएफ को उम्मीद है कि इस गिरोह की परतें जल्द ही खुलेंगी।
रेव पार्टी के लिए आई थी
एसटीएफ ने स्पेशल नाके पर आरोपी व उसके दो साथियों को कार समेत दबोचा
रेव पार्टी के लिए आई थी
एसटीएफ के मुताबिक, यह काफी महंगा नशा है। इसे अक्सर हाई क्लास सोसाइटी प्रयोग करती है। इसके अलावा इस नशे का प्रयोग स्पोर्ट्स मैन भी करते हैं। अब एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इस आइस ड्रग के ग्राहक कौन थे। हालांकि यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि शुक्रवार से वीकेंड शुरू हो जाता है। ऐसे में डिस्को और पबों में पार्टियां होती हैं। इस बारे में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं यह आइस ड्रग पार्टियों के लिए तो नहीं लाई जा रही थी।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं पुलिसकर्मी
एसटीएफ ने साल 2017 में 43 मामले और इस साल में अब तक पांच मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों की जांच के दौरान सप्लाई लाइन तोड़ने के लिए 16 नाईजीरियन को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा पंजाब पुलिस के सब इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी, एक चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक हफ्ते में दूसरी बड़ी सफलता
इससे पहले एसटीएफ ने पाक तस्करों से हेरोइन मंगवाकर पंजाब में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। गिरोह में जम्मू निवासी एक व्यक्ति को दबोचा था, उससे एक किलोग्राम हेरोइन मिली थी। जो अपनी कार में चावल के थैले में छिपाकर ले जा रहा था।
अजय और पवन दोनों बचपन के दोस्त
जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ द्वारा पकड़े गए सब इंस्पेक्टर पवन कुमार और अजय दोनों बचपन के दोस्त हैं और एक ही गांव के रहने वाले हैं। दोनों एक साथ पढ़ते थे। पवन हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हो गया था और अजय कुमार को नौकरी नहीं मिली।
मेथाम्फेटामाइन एक ऐसी दवा है जिसे क्लास ए ड्रग के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब है कि अगर आप इस तरह के कब्जे में हैं, तो आपको कम से कम सात साल के लिए कैद किया जा सकता है।