दो साल पुराने मॉडल पुनीत संधू मर्डर केस में मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय अंशु शुक्ला की अदालत ने चारों आरोपियों सुप्रीत, रामलाल, अंजू और मनप्रीत को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। शहर के चर्चित हत्याकांड में से एक इस मामले में सभी आरोपियों का बरी होना चंडीगढ़ पुलिस की एक ओर नाकामी है। केस की शुरुआत से ही पुलिस की जांच संदेह के दायरे में रही है।
सेक्टर-34 पुलिस थाने में दर्ज हत्या के इस केस में पुलिस की थ्योरी अदालत में साबित नहीं हो सकी। पुलिस अदालत में केस से जुड़े तथ्यों और सबूतों की कड़ी नहीं जोड़ पाई, जिसका फायदा बचाव पक्ष ने उठाया। साथ ही पुलिस हत्या के पीछे का मकसद भी साबित नहीं कर पाई। हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए रिवॉल्वर की रिकवरी पर पुलिस का अहम सरकारी गवाह ही दगा दे गया।
इस पर पुलिस और सरकारी गवाह के अलग-अलग बयान सामने आए। इस पर कोर्ट ने रिकवरी को भी संदिग्ध करार दिया। केस के ट्रायल के पहले ही दिन शिकायतकर्ता मृतका की मां और बेटी दोनों ही अदालत में मुकर गए। यहीं से पुलिस की चुनौती शुरू हो गई थी, जिसे पार करने में यूटी पुलिस नाकाम रही।
पुलिस के लूप होल्स का उठाया फायदा
बचाव पक्ष के वकील रबिंदरा पंडित के अनुसार पुलिस का केस काफी कमजोर था। हालांकि पुलिस ने केस में 40 गवाह बनाए थे, लेकिन कोई भी गवाह ऐसा नहीं था जो ठोस आधार और सबूत पेश कर सके और पुलिस के केस को साबित कर सके। उनके अनुसार केस में पुलिस की थ्योरी में कई लूप होल्स थे। इन पर बचाव पक्ष की ठोस दलीलों के चलते कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ केस साबित न होता देख उन्हें बरी कर दिया।
एडवोकेट के अनुसार पुलिस ने पुनीत की लाश को सबसे पहले देखने वाले अमित (आरोपी रामलाल का बेटा) को ही केस का सबसे अहम और सरकारी गवाह बनाया था। हालांकि उसने कोर्ट में जो बयान दिया, उसने पुलिस के केस को ही कमजोर कर दिया।
इसके अलावा मृतका पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर भी ट्रायल के पहले ही दिन पुलिस को दिए बयान से अदालत में मुकर गए थे। इसके अलावा पुलिस की ओर से कराए गए कई गवाह पुलिस की कहानी के विपरीत बयान दे गए। इनमें आरोपी अंजू का पति आशीष भाटिया और मनप्रीत के पिता दविंदर सिंह भी शामिल थे।