पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में महिला कर्मचारी कैसे कर रही थी पैसों की हेरा-फेरी? मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कई अधिकारी और उनकी कार्यप्रणाली शक के दायरे में आ गई हैं। आखिर कैसे बिना देखे परखे इतनी मोटी रकम के चेक पर हस्ताक्षर होते रहे। दो साल से भी अधिक समय से यह चल रहा था, मगर ऑडिट में भी धोखाधड़ी का खुलासा नहीं हुआ। वहीं आरोपी डेलीवेजर महिला कर्मी से अभी तक 63 लाख रुपये रिकवर किए जा चुके हैं। पता चला है कि इसमें कुछ रकम उसने प्लॉट बेचकर लौटाई है। बता दें कि गबन का मामला पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का है।
ऐसे होते थे चेक साइन
पेंशन सेल में महिला क्लेरिकल पद पर कार्यरत है। कोई भी चेक या दस्तावेज पास होने से पहले कई अधिकारियों के सामने से गुजरता है। इनमें सबसे पहले चेक सीनियर असिस्टेंट फिर सुपरिंटेंडेंट, उसके बाद असिस्टेंट रजिस्ट्रार से होता हुआ आखिर में फाइनेंस एंड डेवलपमेंट अफसर (एफडीओ) के पास पहुंचता है, लेकिन उक्त महिला बीच के तीनों अधिकारियों को बाईपास कर चेक सीधा एफडीओ से ही साइन करवाती थी।
पीयू प्रशासन ने कब्जे में लिया वीजा
महिला ने विदेश जाने की तैयारी कर रखी थी। उसका वीजा भी लगने वाला था। पीयू प्रशासन ने मामला खुलने केबाद भनक लगते ही उसका पासपोर्ट भी कब्जे में ले लिया है।
अधिकारी से था अच्छा तालमेल
बताया जा रहा है कि महिला का एक बड़े अधिकारी से अच्छा तालमेल था। महिला उस अधिकारी के बच्चों को पढ़ाने उनके घर भी जाती रही। उसने ऐसा भरोसा बना लिया था कि वह कई बार चलते-चलते भी चेक पर साइन करवा लेती थी। ऐसे में लापरवाही कई स्तरों पर झलकती है।
अभी तक 92 लाख के गबन का चला पता
मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जमा करवा दी गई है। पूरे मामले की विस्तार से जांच के लिए जांच अधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया है। दो से तीन दिनों में जांच पूरी हो जाएगी।
आईओ की रिपोर्ट के बाद महिला कर्मी पर नियमों के मुताबिक उपयुक्त एक्शन लिया जाएगा। अभी तक 92 लाख रुपये के गबन का पता चला है। जिसमें से 63 लाख रुपये रिकवर कर लिए गए हैं।
-विनीत पुनिया, प्रवक्ता, पंजाब यूनिवर्सिटी