तीन वर्षीय मासूम बेटी की हत्या करने वाली 40 वर्षीय मां मंजू देवी को जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। पुलिस ने मंजू देवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया था।
सारंगपुर थाना पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार अप्रैल 2016 में सारंगपुर से लापता तीन वर्षीय बच्ची का शव संदिग्ध परिस्थितियों में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में मिला था। बच्ची का शव उस वक्त मिला जब एक बोरी को कुत्ते नोच रहे थे। इसके बाद वहां बच्ची का शव मिला। बच्ची की पहचान पिहू निवासी सारंगपुर के तौर पर हुई थी।
पुलिस ने जांच के बाद उसकी 40 वर्षीय मां को गिरफ्तार किया था। उसने कबूला था कि उसने बच्ची की घर में हत्या की थी। बाद में शव को बोरे में डालकर एक ऑटो किराए पर लेकर इंडस्ट्रियल एरिया गई और वहां उसे फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या की धारा के तहत केस दर्ज किया था।
पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया था कि मंजू देवी के चार बच्चे थे। इनमें सबसे बड़ी बेटी के बाद दो बेटे थे। तीन साल की पीहू सबसे छोटी थी। पूछताछ में मंजू ने बताया कि वह अक्सर डिप्रेशन में रहती थी कि दो-दो बेटियों का खर्चा वह कैसे उठाएगी। कैसे उन्हें पढ़ाएगी और कैसे उनकी शादी करेगी। इसके बाद उसने छोटी बेटी को चुना, क्योंकि वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकती थी। 11 अप्रैल को पीहू का मुंह दबाकर हत्या कर दी।
कुत्तों द्वारा नोंची गई बॉडी मिलने के बाद पुलिस ने जांच की तो पाया कि बच्ची से कोई गलत काम नहीं हुआ था। इसके बाद पुलिस ने उसकी हत्या के पीछे मकसद तलाशना शुरू किया। क्राइम ब्रांच ने जांच की तो मंजू के सारंगपुर स्थित घर से एक बोरी पाई जिसमें बच्ची का शव फेंकने से पहले उसमें डाला गया था।
इसके बाद क्राइम ब्रांच ने बच्ची के भाई-बहन से पूछताछ की तो सामने आया कि जिस दिन वह लापता हुई थी, उस दिन उनकी मां ने उसे बुरी तरह पीटा था। इसके बाद पुलिस ने मंजू से सख्ती से पूछताछ की तो उसने सच उगल दिया। मंजू का पति बिहार निवासी रामेश्वर सिंह चंडीगढ़ में कांट्रेक्ट पर बतौर माली काम करता था।