घरवालों की डांट से बचने के लिए दो बच्चों ने वो कदम उठाया, जिसने भी सुना उसकी आंखें खुली रह गईं। घरवालों की डांट से बचने के लिए दो बच्चों ने वो कदम उठाया, जिसने भी सुना उसकी आंखें खुली रह गईं। मामला पंजाब के जालंधर का है। लाडोवाली रोड पर मंगलवार को दो बच्चों ने एक दुकान में आकर दुकानदार को कहा कि उन्हें कोई सरहिंद से अपहरण कर जालंधर लाया है। बच्चों ने उन्हें बताया कि वह बिहार के पूर्णिया जिला के रहने वाले हैं।
वह अपने मौसा नसीब अजहर के साथ बिहार से पंजाब आए थे। उन्होंने बताया कि मौसा ने उन्हें सरहिंद छोड़ दिया, जहां उन्होंने पढ़ाई करनी थी। चार दिन पहले जब वह किताबें और अन्य सामान लेने के लिए बाजार गए तो रास्ते में कुछ युवक उन्हें काले रंग की कार में ले गए। मंगलवार को अपहरणकर्ता उन्हें जालंधर लेकर आए थे। गाड़ी किसी चौक पर रुकी तो वह दोनों वहां से भाग गए। इसके बाद थाना नई बारादरी की पुलिस ने मौके पर पहुंच कर बच्चों से पूछताछ की, तो मामला कुछ और ही निकला।
थाना प्रभारी बलविंदर सिंह ने कहा कि बच्चों का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह खुद ही किसी बस में बैठकर जालंधर पहुंचे थे। दोनों बच्चे जालंधर के बीएसएफ चौक पर उतरे और चौक के सामने जाती लाडोवाली रोड पर घूमते हुए एक दुकान में चले गए। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों ने पुलिस का सच बताया कि वह घूमते हुए बस में सरहिंद से जालंधर आए थे। घरवालों से डांट न पड़े, इसलिए झूठ बोल दिया था। वह दोनों सरहिंद में पढ़ते हैं। थाना प्रभारी ने कहा कि दोनों बच्चों को जज के सामने पेश करने के बाद चाइल्ड होम में भेजवा दिया गया। बच्चों के परिवार वालों को सूचना दे दी गई वह जब जालंधर पहुंचेंगे तो दोनों बच्चें उन्हें सौंप दिए जाएंगे। यह दोनों बच्चे आपस में चचेरे भाई हैं।