पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण कर हत्या के मामले में पड़ोसी सुखदेव उसके भाई गुरमिंदर सिंह और उनके नौकर नंदकिशोर को जिला अदालत ने दोषी करार दिया है। आरोपियों को सजा 18 अप्रैल को सुनाई जाएगी।
यह था मामला
बुडै़ल निवासी पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण 21 दिसंबर 2010 को घर के पास से किया गया था। अपहरण के बाद उसके चाचा के मोबाइल फोन पर दस लाख रुपये की फिरौती की कॉल आई थी।
खुशप्रीत के परिजनों ने अपहरणकर्ताओं को चार लाख फिरौती दी थी। फिरौती लेने के बाद पांच जनवरी 2011 को अपहरणकर्ताओं ने खुशप्रीत की हत्या कर शव मोहाली में फेंक दिया था।
शव मिलने के बाद बुडै़ल के लोगों ने पुलिस पर पत्थराव किया और पुलिस की गाड़ियों में आग लग दी थी। इस पर डीएसपी समेत सेक्टर-34 थाना प्रभारी पर गाज गिरी थी।
मामले की जांच एडीसी ने की थी। बाद में डीएसपी विजय कुमार ने हत्या के मामले में खुलासा करते हुए खुशप्रीत के पड़ोसी सुखदेव और गुरमिंदर को दबोचा था।
पुलिस ने मामले में शामिल उनके नौकर नंद किशोर को पकड़ा था। 07 अगस्त 2011 को अदालत ने सुखदेव, गुरमिंदर और नंद किशोर के खिलाफ आरोप तय किए थे।
खुशप्रीत के पिता लखविंदर सिंह के अनुसार खुशप्रीत के हत्यारों को फांसी मिलनी चाहिए। फिरौती लेने के बावजूद उन्होंने खुशप्रीत की हत्या कर दी थी। उन्हें तभी सुकून मिलेगा, जब हत्यारों को अदालत फांसी देगी।
खुशप्रीत की मां कुलविंदर कौर के अनुसार बेटे के हत्यारों को फांसी के अलावा कोई सजा नहीं होनी चाहिए। बेटे के बिना रहना कितना मुश्किल है एक मां ही जानती है। हत्यारों ने एक सप्ताह तक बच्चे के हाथ पांव बांधकर अंधेरे कमरे में रखा और बाद में नशे की गोलियां खिलाकर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। ऐसे हत्यारो नू रब भी माफ नहीं करदा।