आरएसएस नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा हत्याकांड में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का हाथ सामने आ रहा है। इसके लिए यूरोप में बैठकर पूरी योजना तैयार की गई थी। खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के चीफ हरमिंदर मिंटू ने यूरोपियन देशों में बैठे केएलएफ के आतंकवादियों से मदद ली थी। उनकी बनाई योजना को ही शूटर के माध्यम से सिरे चढ़ाया। मिंटू से मोगा में पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ है। पुलिस अब यूरोप में बैैठे आतंकवादी और उनके सहयोगियों का पूरा ब्योरा तैयार कर रही है।
हरमिंदर सिंह मिंटू पहले आतंकी संगठन बब्बर खालसा का सदस्य था। 1986 में अरूर सिंह और सुखविंदर सिंह बब्बर ने जब खालिस्तान लिबरेशन फोर्स बनाई तो वह भी उससे जुड़ गया। इसके बाद खालिस्तान आंदोलन में शामिल रहे चार बड़े संगठन भी 1995 में केएलएफ से जुड़ गए। फिर मिंटू केएलएफ का मुखिया बन गया। मिंटू बब्बर खालसा के प्रमुख रहे पाकिस्तान में आईएसआई की गोद में बैठे वधावा सिंह का करीबी भी रहा है।
2014 में पंजाब पुलिस ने मिंटू को गिरफ्तार किया था। आतंक से जुड़े 10 मामलों में उसकी तलाश थी। 2008 में हरमिंदर मिंटू पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर हमले का आरोप है। 2010 में हलवारा एयरफोर्स स्टेशन से एक्सप्लोसिव लूटने का भी आरोप है। इसके बाद मिंटू भारत छोड़कर पाकिस्तान चला गया था। वहां से 2013 में वह यूरोप चला गया। साउथ-ईस्ट एशिया लौटने से पहले वह इटली, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस और कई अन्य यूरोपीय देशों में गया था। 2014 में हरमिंदर को जब दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया, तब पता चला था कि वह मलयेशिया के नकली पासपोर्ट पर सफर कर रहा था। पासपोर्ट में उसका नाम गुरदीप सिंह था। वह थाईलैंड में अपने पैर जमाना चाहता था, जिससे वह अपने संगठन के लिए फंड जुटा सके।
बीच बाजार की थी गगनेजा की हत्या
- फोटो : File Photo
नाभा जेल ब्रेक में मिंटू की थी अहम भूमिका
नाभा जेल ब्रेक में मिंटू की अहम भूमिका थी। वह खुद गैंगस्टरों के साथ फरार हो गया था, लेकिन उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया था। मिंटू की जिसने दिल्ली तक पहुंचने में मदद की थी, वह गैंगस्टर धर्मेंद्र गुगनी का करीबी था। उसने गुगनी के कहने पर मिंटू की मदद की थी। गुगनी को मोगा पुलिस ने गिरफ्तार किया तो सच सामने आया कि इसमें तानाबाना हरमिंदर मिंटू ने ही बुना था। इसके लिए इटली और जर्मनी से पैसा अदा किया गया था। इसमें इटली में बैठे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकवादियों का मुख्य हाथ सामने आ रहा है।
इस मामले में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का हाथ होने के पुख्ता सुबूत मिल गए हैं। यूरोप में बैठे कई आतंकवादियों की मदद गगनेजा हत्याकांड में ली गई थी। इस पर पूरी जांच की जा रही है।
-सुरेश अरोड़ा, डीजीपी, पंजाब
बीच बाजार की थी गगनेजा की हत्या
छह अगस्त 2016 को आरएसएस के प्रांत सह संघचालक ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) जगदीश गगनेजा जालंधर में ज्योति चौक के पास रेडक्रॉस मार्केट में खड़े थे। इस दौरान बाइक पर आए दो नकाबपोश युवकों ने उन पर गोलियां बरसा दी थीं। गगनेजा को गंभीर हालत में पटेल अस्पताल में दाखिल करवाया गया जहां से उन्हें लुधियाना डीएमसी के लिए रेफर कर दिया गया। वहां उनकी मौत हो गई थी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में गोली चलाते नकाबपोश आरोपी दिखे थे। इस केस की जांच सीबीआई कर रही है।