लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी, मसूरी की सुरक्षा में तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सब इंस्पेक्टर को गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतारने वाले आरोपी कांस्टेबल को सेक्टर-36 थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
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पुलिस ने रविवार को आरोपी को थाने के सामने फ्रेगरेन्स गार्डन (पार्क) से युवती का किडनैपर समझकर गिरफ्तार किया है। लेकिन पूछताछ में हत्या की वारदात का खुलासा हो गया। वहीं देहरादून पुलिस आरोपी को ट्रांजिट वारंट पर चंडीगढ़ से दून के लिए रवाना हो गई है।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
साउथ एएसपी बराड़ के अनुसार सूचना मिली थी कि कोई व्यक्ति एक लड़की को बहलाकर यहां लाया है। इसके बाद पार्क में एएसआई सेवा सिंह, एसआई राम दयाल, एक हेड कांस्टेबल और एक वालंटियर की टीम ने छापामारी की। पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगा।
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पुलिस ने उससे लड़की के बारे में पूछताछ की। घबराहट में आरोपी ने कहा कि वह अपने भाई से बात करना चाहता है। पूछताछ में पुलिस ने पूरी डिटेल खंगाली तो वारदात का खुलासा हुआ। सेक्टर-36 पुलिस ने देहरादून पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी की सूचना दे दी है।
मां की गाली दी, तो मारी गोली
आरोपी चंद्रशेखर मूलरूप से हिमाचल, कांगड़ा का निवासी है। उसने पंचकूला स्थित भानू एरिया से ट्रेनिंग की थी। इस कारण चंडीगढ़ में ही कुछ लोगों से उसकी जान-पहचान थी।
आरोपी ने बताया कि वारदात से पहले उसने वर्दी के नीचे सादे कपड़े पहन लिए थे। वारदात के बाद वह मसूरी में ही पास के जंगल में दो दिन छिपा रहा। वहां उसने वर्दी उतार दी और सादी ड्रेस में मेन रोड से बस लेकर वह चंडीगढ़ पहुंच गया। रविवार को सुबह वह सेक्टर-43 बस स्टैंड पर उतरा।
चंडीगढ़ के बार में जानकारी होने के कारण वह सेक्टर-34 के पार्क में आराम करने पहुंचा। पूछताछ में चंद्रशेखर ने बताया कि मसूरी में एसआई सुरेंद्र लाल ने उसे ‘मां’ की गालियां दी थी। उसने इसका विरोध करते हुए कहा था कि मां की गाली मत दो मेरा दिमाग खराब हो जाता है।
इसके बाद उसे सामान कम बताकर व अन्य बातों पर एसआई परेशान करने लगा। इसके बाद उसने गोली मारने का प्लान बनाया और एसआई को गोली मार दी। इस घटना में एसआई सुरेंद्र की मौत हो गई थी और बीच-बचाव में कांस्टेबल अख्तर भी गोली लगने से घायल हो गया।
एक और दारोगा को मारना चाहता था, सामने नहीं आया
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने कहा कि पूछताछ में टीम को आरोपी ने बताया कि ड्यूटी के बाद सिपाही की ओर से गारद कमांडर सुरेंद्र लाल को चाय पिलाए जाने की व्यवस्था थी। एक दिन उसकी एएसआई राकेश से चाय न देने पर कहासुनी हो गई थी। दारोगा और एएसआई ने उसके साथ अभद्रता की। तब से दोनों से उसकी ठन गई थी।
इसी बीच मोबाइल पर चैटिंग प्रकरण ने आग में घी डालने का काम किया। चैटिंग करने पर सजा देने के दौरान उनमें बहस हो गई। आरोपी सिपाही ने बताया कि गाली दिए जाने के बाद उसने दारोगा सुरेंद्र लाल और सहायक दारोगा राकेश की हत्या करने की साजिश रची।
वारदात वाले दिन आरोपी चंद्रशेखर काफी देर तक सहायक दारोगा राकेश का दारोगा सुरेंद्र्र के पास आने का इंतजार करता रहा, लेकिन जब वह नहीं आया तो सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र लाल पर ही गोलियां दाग दीं। बीचबचाव करने आए अख्तर हुसैन को भी गोली लग गई। कहा कि उसने दूरी पर खड़े एएसआई राकेश पर फायर मारा था, लेकिन वह बच गया।
कांस्टेबल ने बेबाकी से कबूला जुर्म
गारद कमांडर की हत्या और साथी जवान को घायल करने वाले आईटीबीपी के सिपाही ने रविवार को बेबाकी से अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी सिपाही चंद्रशेखर ने साफ कहा कि वह दो दारोगाओं की जान लेना चाहता था, लेकिन एक उसके सामने नहीं आया। इससे उसकी जान बच गई।
कहा कि गाली-गलौज किए जाने के कारण उसकी खोपड़ी घूम गई थी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सिपाही चंद्रशेखर के रविवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-36 में पकड़े जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। सीओ विकासनगर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने चंडीगढ़ पहुंचकर आरोपी सिपाही से गहन पूछताछ की।
पूरी तैयारी के साथ दिया था वारदात को अंजाम आरोपी सिपाही ने पूछताछ में बताया कि शुक्रवार को वारदात को अंजाम देने से पहले उसने बैंक खाते से रुपये निकाले और फिर वर्दी के नीचे सादे कपड़े पहन लिए, ताकि भागते समय वर्दी उतार सके। बताया कि वारदात के बाद मौके से फरार होने के बाद जंगल में वर्दी उतारने के बाद उसने हथियार को छिपा दिया। इसके बाद सादे कपड़ों में ही वह यहां से फरार हुआ।
200 रुपये में आया देहरादून आरोपी सिपाही ने बताया कि खून-खराबा करने के बाद वह रातभर जंगल में छिपा रहा। तड़के में वह कैंपटीफाल पहुंच गया। यहां से शनिवार सुबह आठ बजे के करीब टैक्सी में 200 रुपये देकर देहरादून आया। यहां आईएसबीटी से बस से वह पहले हरिद्वार गया। वहां से बस में सवार होकर चंडीगढ़ पहुंच गया।
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को आईटीबीपी कांस्टेबल चंद्रशेखर ने एलबीएसएए की सुरक्षा में तैनात गारद कमांडर और एसआई सुरेंद्र लाल को एलएमजी से गोलियां बरसाकर मौत घाट उतार दिया था।
बचाव में आया एक अन्य कांस्टेबल अख्तर भी गोली लगने से घायल हो गया था। जबकि दो अन्य जवान बाल-बाल बचे थे। वारदात के बाद से हमलावर जवान एलएमजी और कारतूस लेकर फरार हो गया था।
आईटीबीपी और पुलिस की 12 टीमें शुक्रवार शाम से ही आरोपी की तलाश में जुटी थी। करीब 36 घंटे बाद आरोपी को चंडीगढ़ के सेक्टर-36 से गिरफ्तार किया गया है।