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साधुओं को नपुंसक बनाने पर भड़का हाईकोर्ट

Thu, 18 Dec 2014 04:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ साधुओं को नपुंसक बनाने के आरोप के मामले में हाईकोर्ट ने जांच नहीं करने पर हरियाणा सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है। खुली अदालत में जस्टिस के कानन ने सरकार से पूछा कि यदि कोई सिर काटने की पेशकश करे तो क्या ऐसा होने की इजाजत दी जा सकती है।
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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी सरकार की ओर से जेल में बंद सात साधुओं के दर्ज उन बयानों पर की, जिनके बारे में कहा गया कि वह स्वेच्छा से नपुंसक बने थे। मेडिकल जांच में नपुंसक साबित हो चुके हंसराज चौहान ने डेरे में सैकड़ों साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की थी।

सीबीआई से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं

इसी बीच एक अर्जी देकर यह भी कहा था, चूंकि डेरा प्रमुख ने विधानसभा चुनाव में भाजपा की मदद की और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है, ऐसे में सीबीआई से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।

पिछली सुनवाई पर एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने बेंच को आश्वासन दिया था कि सरकार स्वयं इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। बेंच ने आदेश दिया था कि साधुओं को नपुंसक बनाने के पीछे कौन है।

बुधवार को सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा कि सात साधुओं के बयान लिए गए हैं। इन लोगों ने कहा कि वे स्वेच्छा से नपुंसक बने हैं। चौहान के वकील नवकिरन सिंह ने बेंच को बताया कि यह बयान पहले के हैं और सरकार ने जांच के नाम पर कुछ नहीं किया। एसपी सिरसा ने चौहान को मंगलवार को ही बुलाकर नपुंसक साधुओं की सूची मांगी।

बेंच ने सख्ती बरतते हुए सरकार से पूछा कि आखिर वह जांच से क्यों कतरा रही है। क्या राम रहीम का प्रभाव इतना है कि वह डेरे में जाकर अन्य साधुओं से पूछताछ से डर रही है।
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याचिका में लगाया गया आरोप

उल्लेखनीय है कि याचिका में आरोप लगाया गया था कि डेरा प्रमुख अपने श्रद्धालुओं को यह लालच देते थे कि यदि वह नपुंसक बनेंगे तो वह (राम रहीम) उनका भगवान से मेल करवा देंगे। बेंच ने कहा कि संतों का काम धार्मिक उपदेश देना है। ऐसे गंभीर आरोप को सरकार गंभीरता से ले रही है।

बेंच ने डेरा प्रमुख के वकील एसकेगर्ग नरवाना से भी इस आरोप पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। नरवाना ने उल्टा याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया कि यह सारा कुछ ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा रहा है।

सरकार के जांच प्रति ढुलमुल रवैये को देखते हुए और अन्य पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला आने पर ही स्पष्ट होगा कि साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में क्या होगा।
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