लोक गायक हंसराज हंस ने बुधवार को शिअद को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा डिप्टी सीएम व शिअद प्रधान सुखबीर बादल को भेज दिया है और इसकी एक प्रति जिला अकाली दल के प्रधान गुरचरण सिंह चन्नी को उनके घर जाकर दिया है। हंस लंबे समय से पार्टी में हाशिये पर चल रहे थे। हालांकि वे पार्टी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के अलावा पीएसी के सदस्य भी थे। लेकिन सक्रिय राजनीति से दूर रखे जाने से वे उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
हंस की गायकी से राजनीति में 2009 में एंट्री हुई थी। पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जालंधर संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा था लेकिन हंस कांग्रेस के मोहिंदर सिंह केपी से चुनाव हार गए थे। चुनाव में हार के बाद हंस काफी समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे।
काफी समय से पार्टी से नाराज चल रहे थे हंस
बाद में विदेश में एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली थी। उन्होंने खुलेआम पार्टी से किनारा करने की घोषणा भी कर रखी थी। लेकिन शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने पहल कर उन्हें मना लिया था। हाल ही में गठित नई कार्यकारिणी में उनको शिअद का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व पीएसी का सदस्य बनाया गया।
2014 के लोकसभा चुनाव में हंस ने शिअद उम्मीदवार पवन कुमार टीनू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि टीनू ने ही चुनाव में उनको हराया था और वह पार्टी के काबिल उम्मीदवार नहीं हैं।
कहा, सुकून की जिंदगी जीना चाहता हूं
इसको लेकर काफी शोरशराबा मचा और पार्टी प्रधान सुखबीर बादल खुद हंस के घर पर पहुंचे। हंस को मनाकर उन्हें बठिंडा से चुनाव लड़ रहीं हरसिमरत के चुनाव प्रचार का जिम्मा सौंपा था। हरसिमरत की जीत के बाद हंस दोबारा राजनीति में दिखाई नहीं पड़े।
इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा कि वह राजनीति में जीवन व्यतीत नहीं करना चाहते। हंस से बार-बार कारण पूछा गया तो उनका सीधा जवाब था कि अब उन्हें सुकून और शांति का जीवन व्यतीत करना है। उन्होंने कहा कि बस अब राजनीति नहीं करनी।